अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित स्वास्थ्य जांच शिविर को लेकर दिखा उत्साह
भुंतर के साथ लगते क्षेत्रों के अलावा कुल्लू और नेउली सहित अन्य जगहों से भी लोग पहुंचे
उपचार के साथ निशुल्क दी गईं दवाइयां, शिविर में बुजुर्ग और महिलाओं की संख्या रही ज्यादा
संवाद न्यूज एजेंसी
भुंतर (कुल्लू)। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित स्वास्थ्य जांच शिविर को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। शिविर में भुंतर के साथ लगते क्षेत्रों के अलावा कुल्लू और नेउली सहित अलग-अलग जगहों से भी लोग पहुंचे।
जनजातीय भवन भुंतर में आयोजित स्वास्थ्य जांच शिविर में सुबह 8:30 बजे से मरीजों का पहुंचना शुरू हुआ। इसके बाद धीरे-धीरे लोगों की संख्या बढ़ती गई। इस दौरान उपचार करवाने के लिए आए लोगों की कतार लग गई। शिविर का विधिवत शुभारंभ सुबह 10:30 बजे हुआ। इसके बाद डॉक्टरों ने मरीजों की जांच शुरू की। शिविर में बुजुर्ग और महिलाओं की संख्या अधिक रही। स्वास्थ्य जांच शिविर दोपहर दो बजे तक चला।
स्वास्थ्य जांच शिविर में मुफ्त उपचार की सुविधा मिली। जांच के साथ दवाइयां भी मुफ्त दी गईं। यह सराहनीय कदम है। इससे ऐसे लोगों को भी फायदा होता है जो अस्पताल नहीं जा सकते या आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं। -देव दासी
ऐसे स्वास्थ्य जांच शिविर समय-समय पर करवाने चाहिए जिससे बुजुर्गों को अस्पतालों के चक्कर न काटने पड़ें और उन्हें अपने ही क्षेत्र में उपचार की सुविधा मिल सके। शिविर में उपचार करवाने का मौका मिला है। - पालमो
काफी समय से अस्वस्थ चल रहा था लेकिन अस्पताल नहीं जा सका। शिविर के आयोजन से फायदा मिला है। अस्पताल के चक्कर काटने से बच गया। जांच करवाने के साथ दवाइयां भी यहीं मिल गईं। यही अच्छी पहल है। -छोडोन
मेरी आंख और टांगों में सूजन हो रही थी। इन बीमारियों का उपचार इस शिविर में करवाया। शिविर में डॉक्टरों से स्वास्थ्य संबंधी सलाह मिली। दवाइयां भी निशुल्क उपलब्ध करवाई गईं। अस्पताल जाने से राहत मिली है। -सोनम अंगमो
यह शिविर सिर्फ बुजुर्गों के लिए ही नहीं था। इसमें महिलाओं और युवतियों को भी अपने स्वास्थ्य की जांच करवाने का मौका मिला। ऐसे शिविर आयोजित करना अच्छा प्रयास है। अमर उजाला फाउंडेशन ने बेहतरीन कार्य किया है। -एनजी बौद्ध
उम्र के इस पड़ाव में अस्पतालों के चक्कर काटना काफी पीड़ादायक रहता है। इस तरह के शिविरों के आयोजन से बुजुर्ग लोगों को काफी फायदा पहुंचता है। भविष्य में भी इस तरह के शिविरों का आयोजन किया जाना चाहिए। -देवी चंद