कहा- खराब आर्थिक स्थिति का बहाना बना रही प्रदेश सरकार
चेताया, 25 नवंबर तक पेंशनरों तक भुगतान नहीं तो होगा संघर्ष
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। हिमाचल प्रदेश पेंशनभोगी संघ का 15 नवंबर 2024 को लोकतांत्रिक एवं सांविधानिक प्रक्रिया से गठन किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य पेंशनधारकों के हितों की रक्षा करना है।
एक वर्ष के लघु अंतराल में संघ के बैनर तले प्रदेश के पेंशनरों के मसलों को राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन के समक्ष प्रमुखता से उठाया है।
यह बात संघ के प्रदेशाध्यक्ष एलआर गुलशन ने कही। संघ का पहला स्थापना दिवस बालगोपाल भवन शमशी में मनाया। इसमें प्रदेशाध्यक्ष ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उन्होंने हैरानी जताई कि मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों, विधानसभा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के मासिक वेतन और भत्तों में अप्रत्याशित वृद्धि की गई है जबकि सरकार करीब 1.80 लाख पेंशनधारकों की करोड़ों की वित्तीय देनदारियों को खराब आर्थिक स्थिति का बहाना बनाकर तीन सालों से अनावश्यक रूप से लटका रही है।
उन्होंने कहा कि पेंशनर एक जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तक संशोधित वेतनमान के बकाया एरियर, संशोधित पेंशन, ग्रेच्युटी, 40 प्रतिशत पैंशन कम्युटेशन, लीव इन कैशमेंट, एक जुलाई 2023 से महंगाई भत्ते की लंबित पांच किस्तों की अदायगी, एक जनवरी 2022 से पेंशनरों को देय करीब 115 महीनों के महंगाई भत्ते के एरियर, चिकित्सा बिलों की अदायगी और सभी जिला मुख्यालयों में पेंशनर भवन बनाने की मांग कर रहे हैं। अगर सरकार ने 25 नवंबर तक पेंशनरों की सभी वित्तीय देनदारियों का एकमुश्त भुगतान नहीं किया तो संघर्ष को तेज किया जाएगा।
एसपी सागर और सुरेश बने संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष
प्रदेश पेंशनभोगी संघ के स्थापना दिवस पर सेवानिवृत्त एसडीओ एसपी सागर एवं सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुरेश कुमार शर्मा को संघ का प्रदेश उपाध्यक्ष, खेम सिंह हांडा को जिला कुल्लू पेंशनभोगी संघ का कार्यवाहक महासचिव, शारदा नंद शर्मा को सर्वसम्मति से जिला मंडी पेंशनभोगी संघ का अध्यक्ष, कन्हैया लाल शास्त्री को महासचिव, गंगाराम को कोषाध्यक्ष, हरिराम को संयुक्त सचिव और सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य परमदेव कौंडल को मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया।