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Kullu News: आलू के लिए मशहूर लाहौल की भूमि में तैयार होगा ऑर्गेनिक सेब

Sun, 06 Apr 2025 10:43 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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बर्फ पिघलने के साथ 11000 फीट की ऊंचाई पर सेब पौधे लगा रहे बागवान
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घाटी में सुपर चीफ, हेफ्के, ग्रेनी स्मिथ, अर्ली रेड वन प्रजातियों को दे रहे तव्वजो
संवाद न्यूज एजेंसी

केलांग (लाहौल-स्पीति)। देश भर में कभी सबसे उत्तम गुणवत्ता के आलू बीज के उत्पादन के लिए विख्यात लाहौल घाटी अब सेब की पैदावार में आगे बढ़ रही है। समुद्रतल से 10 से 11,000 फीट की ऊंचाई पर बागवान ऑर्गेनिक सेब की पैदावार कर रहे हैं।
बर्फ पिघलने के साथ इन दिनों बागवान सेब के नए पौधे लगा रहे हैं। हालांकि, लाहौल में लगभग बीस साल पहले व्यावसायिक तौर पर सेब उत्पादन शुरू हुआ है, लेकिन पिछले कुछ साल से लाहौल का सेब देश की मंडियों में पहुंच रहा है।
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बागबानी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक लाहौल में करीब 14,800 बीघा जमीन पर सेब की पैदावार हो रही है। शुरुआती दौर में बागवान यहां रॉयल और गोल्डन वैरायटी के सेब के पौधे लगाने को वरीयता देते रहे, लेकिन अब घाटी में सुपर चीफ, हेफ्के, ग्रेनी स्मिथ, अर्ली रेड वन, मेमा मेस्टर जैसी प्रजातियों को तव्वजो दे रहे हैं। सर्दी के मौसम में बर्फबारी होने से लाहौल में सेब के लिए जरूरी चिलिंग ऑवर्स पूरे होने से घाटी में बेहतर क्वालिटी का सेब तैयार हो रहा है। बागवान विनोद, सुरिंद्र, रोहित और अमर लाल ने कहा कि लाहौल में फिलहाल सेब के बगीचों में न के बराबर रसायनिक उपयोग किया जा रहा है। यही कारण है कि लाहौल के सेब का छिलका मोटा होने के कारण इसकी ड्यूरेबिलिटी लंबी है और अधिक रसदार है।
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लाहौल में 1200 हेक्टेयर क्षेत्र में हो रही सेब की पैदावार

बागवानी विभाग के अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि लाहौल में लगभग 1200 हेक्टेयर भूमि पर सेब के बगीचे हैं। विभाग बागवानों को रियायती दरों पर सेब के पौधे उपलब्ध करवाता है। साथ ही पौधों की प्रूनिंग के लिए विशेषज्ञ टीम से बागवानों को प्रशिक्षण भी उपलब्ध करवाती है।
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