कुल्लू। प्रदेश सरकार की कैबिनेट में बिजली महादेव रोपवे के संचालन, विकास और रखरखाव को स्वीकृति देने के बाद रोपवे के विरोध में स्वर तेज हो गए हैं। बिजली महादेव रोपवे संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार के निर्णय का विरोध जताया है।
272 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को लगाने के लिए सरकार राजी हो गई है। पर्वतमाला स्कीम योजना के तहत बनने वाले बिजली महादेव रोपवे का मामला कुछ समय तक ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। रोपवे के मुनाफे को लेकर 11 अक्तूबर, 2023 को कैबिनेट में एमओयू को मंजूरी प्रदान नहीं की गई थी। अब केंद्र और प्रदेश सरकार मुनाफा आधा-आधा करने पर राजी हो गई है।
इसके चलते बिजली महादेव रोपवे बनाने की दिशा में सकारात्मक पहल हुई है। बिजली महादेव रोपवे संघर्ष समिति भी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। समिति अब आगामी रणनीति बना रही है। समिति की ओर से जल्द ही उपायुक्त के माध्यम से एक ज्ञापन प्रदेश सरकार को सौंपा जाएगा। इसके बावजूद प्रदेश सरकार अगर उनकी बात को नहीं सुनती है तो समिति एक बार फिर सैकड़ों लोगों के साथ सड़कों पर उतर सकती है।
इससे पहले कुल्लू में सैकड़ों लोगों के साथ बिजली महादेव रोपवे संघर्ष समिति ने बाजार बंद रखकर धरना प्रदर्शन किया था। बिजली महादेव रोपवे संघर्ष समिति के सदस्य एवं जिया पंचायत के प्रधान संजू पंडित ने कहा कि देवभूमि में देववाणी का सम्मान किया जाना चाहिए। सरकार देवस्थल को पर्यटन स्थल में बदलने की कोशिश कर रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विकास के नाम पर देवस्थलों से छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए।
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एनएचएआई की कंपनी नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड को बिजली महादेव रोपवे में नोडल एजेंसी बनाया है। मौहल स्थित नेचर पार्क से लेकर बिजली महादेव के लिए करीब पौने तीन किलोमीटर रोपवे बनाया जाना प्रस्तावित है।