मान्यता.... लाहौल के झोलिंग स्थित बुहारी मंदिर को माना जाता है मन्नतों का मंदिर
साल 2032 तक हो चुकी है बुकिंग, साल में एक बार ही होता है तीन दिन का जगराता
दिनेश जस्पा
उदयपुर (लाहौल-स्पीति)। लाहौल घाटी के झोलिंग गांव स्थित बुहारी मंदिर आस्था का एक ऐसा केंद्र है जहां मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु जगराता करवाते हैं लेकिन इसके लिए सालों लंबा इंतजार करना पड़ता है।
इस मंदिर में सालभर में केवल एक ही जगराता होता है। फिलहाल अगली तारीख 2032 तक बुक है। खास बात यह है कि इस मंदिर की ओर महिलाएं नहीं जातीं लेकिन देवता के गांव आगमन पर उनका पारंपरिक स्वागत करती हैं।
मान्यता के अनुसार मंदिर में वर्ष भर में एक ही जगराता करवाया जाता है। मंदिर के पुजारी के अनुसार बुहारी मंदिर का जगराता यहां होने वाली विवाह की तर्ज पर रहता है। एक जगराते के लिए तीन दिन का समय लगता है। इसका खर्च जगराता देने वाले को ही उठाना पड़ता है। इन दिनों चल रहे तीन दिवसीय जगराते का सोमवार को समापन होगा। यह जगराता आड़त गांव के एक बैंक अधिकारी की ओर से करवाया गया। इस बीच देव गूरों की भव्य देव खेल देखने को मिली। पुजारी पृथी चंद ने बताया कि सोमवार को देव कारज के निर्वहन के बाद देवता को झोलिंग गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर ऊपर पहाड़ी में स्थित अपने मंदिर में पुनः विराजमान किया जाएगा।
महिलाएं नहीं करती हैं बुहारी मंदिर का रुख
महिला श्रद्धालु झोलिंग की पहाड़ी पर स्थित बुहारी मंदिर का रुख नहीं करती हैं। पुरातन मान्यताओं का आज भी निर्वहन किया जा रहा है। यह जरूर है कि देवता के गांव प्रवेश पर महिलाएं ही परंपरागत रीति अनुसार देवता के स्वागत को खड़ी रहती है। ऐसे में महिला श्रद्धालु बुहारी देवता के गांव प्रवेश पर बेसब्री से इंतजार करती हैं।