दस साल से भौतिक विज्ञान प्रवक्ता का पद चल रहा है खाली
लाहौल घाटी के सबसे पुराने स्कूलों में शुमार है जाहलमा स्कूल
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। सरकारों की शिक्षा के प्रति उदासीन रवैया जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों पर भारी पड़ने लगा है। शून्य नामांकन के चलते सरकार उदयपुर स्कूल में विज्ञान संकाय को बंद करने की घोषणा कर चुकी है।
अब उदयपुर की तर्ज पर जाहलमा आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के विज्ञान संकाय पर भी संकट खड़ा हो गया है। दरअसल, बीते दस साल से स्कूल में भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता का पद खाली है। इस कारण इस स्कूल में भी विज्ञान संकाय में जमा एक कक्षा में एक भी विद्यार्थी ने प्रवेश नहीं लिया है। जमा दो में कुछ विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, लेकिन उनके पासआउट होने के बाद यहां भी जीरो एनरोलमेंट होने की संभावना है। दस साल में सरकार ने यहां भौतिक विज्ञान के शिक्षक की नियुक्ति नहीं की है। इससे अभिभावकों में भी बच्चों को इस स्कूल में प्रवेश दिलाने पर संशय बना हुआ है।
अधिकारी दे चुका है स्कूल
जाहलमा स्कूल तीन आईएएस, एक आईपीएस और एक एचएएस समेत दर्जनों डॉक्टर और इंजीनियर दे चुका है। केएस क्रोफा मेघालय में चीफ सेक्रेटरी पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। राम सिंह और प्रेम सिंह दो भाई आईएएस पद पर सेवाएं दे रहे हैं। ओपन सीट से बने पहले एसएएस अधिकारी अश्विनी कुमार कुल्लू जिले में एडीएम के पद पर कार्यरत हैं। ये अधिकारी इसी स्कूल से पढ़े हैं।
जाहलमा स्कूल में क्षेत्र की सात पंचायतों के बच्चे विज्ञान संकाय पढ़ने आते हैं। भौतिक विज्ञान का प्रवक्ता न होने से लोगों को अपने बच्चों को कुल्लू या दूसरे स्कूलों में पढ़ाना पड़ रहा है। - सरोज, अध्यक्ष एसएमसी
स्कूल में वर्ष 2014 से भौतिक विज्ञान प्रवक्ता का पद खाली है। चालू शैक्षणिक सत्र में जमा एक में एक भी विद्यार्थी पंजीकृत नहीं है। जमा दो विज्ञान संकाय में कुछ विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। शिक्षक के पद को लेकर निदेशालय को रिपोर्ट समय-समय पर भेजी जाती है।
- प्रेम जीत, प्रधानाचार्य, जाहलमा स्कूल