कुपोषण, निमोनिया और डायरिया जैसी बीमारियों से बचाने के लिए विभाग की नई पहल
सीएचओ और एएनएम को दिया विशेष प्रशिक्षण, घर-द्वार जाकर करेंगी बच्चों का उपचार
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। जिले में शून्य से पांच साल तक के बच्चों की देखभाल को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने नई पहल शुरू की है। बच्चों को कुपोषण, निमोनिया और डायरिया जैसी बीमारियों से बचाने के लिए अब उन्हें घर पर ही प्राथमिक उपचार दिया जाएगा। इसके लिए सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) और एएनएम को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
जिला के पांचों स्वास्थ्य खंडों जरी, नग्गर, बंजार, आनी और निरमंड में करीब 30,000 पांच साल तक उम्र के बच्चे हैं। इन सभी बच्चों को घर-द्वार पर प्राथमिक उपचार देने की योजना विभाग ने बनाई है। शहरों के तर्ज पर ग्रामीण क्षेत्रों में भी बच्चों का घर-द्वार पर उपचार होगा। इसके लिए सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) और एएनएम बच्चों का प्राथमिक उपचार करेंगी। बच्चों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध करवाने की सीएचओ और एएनएम को विशेष नवजात शिशु रोग के एकीकृत प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया गया है।
गौरतलब है कि सीएचओ और एएनएम ने शून्य से पांच साल तक के बच्चों को प्राथमिक उपचार घर पर देने की तकनीक सीखी है। इसके अलावा उन्होंने बच्चों में कुपोषण, निमाेनिया और डायरिया के लक्षणों की पहचान करने का प्रशिक्षण लिया है। इसका फायदा यह होगा कि अब यह विशेष प्रशिक्षण पाकर बच्चा किस बीमारी से ग्रस्त है। इसका पता घर-द्वार पर लगा पाएंगे और मौके पर ही बच्चे का प्राथमिक उपचार शुरू किया जाएगा। इससे घर से अस्पताल के बीच की दूरी तय करने से पहले ही उपचार की सुविधा मुहैया हो पाएगी।
उधर, इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणजीत ठाकुर ने कहा कि जिला कुल्लू में नवजात शिशु रोगों की चपेट में न आएं, इसके लिए सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) और एएनएम को प्रशिक्षण दिया है। प्रशिक्षित सीएचओ और एएनएम बच्चों की घर-द्वार पर देखभाल करेंगी।