जिले में शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण शिक्षा के क्षेत्र में अव्यवस्थाओं का आलम है। हालत यह है कि शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण कई स्कूल बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। जबकि, कई स्कूलों पर तो ताला लग भी चुका है। इसके चलते यहां के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले में सबसे दयनीय हालत केलांग शिक्षा खंड-2 के तहत आने वाले क्षेत्र की है।
इस ब्लॉक में 41 स्कूल थे। इनमें लोमच, लिंडूर और चेम्बक स्कूलों में तो ताला लटक चुका है। वहीं, मार्च में इसी शिक्षा खंड के तहत आने वाले और कुछ स्कूलों को भी बंद करने की बात चल रही है। क्योंकि स्कूलों में शिक्षक न होने के कारण अभिभावकों को अपने बच्चों को इन स्कूलों से निकाल कर निजी स्कूलों में दाखिल करवाने को मजबूर होना पड़ रहा है। लेकिन, जो निजी स्कूलों का खर्च नहीं उठा पा रहे हैं उन अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है। कई स्कूलों में शिक्षक न होने के कारण बच्चों को दूसरे गांव में जा कर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है। ऐसे में सर्दी के मौसम में बच्चों को भारी बर्फबारी में भी पैदल रास्ता पार करना पड़ रहा है।
हालांकि, सरकार ने लोगों की मांग पर घाटी में हर गांव में स्कूल तो खोल दिया है, लेकिन इन स्कूलों में शिक्षक ही तैनात नहीं किए गए हैं। हालात यह हैं कि कई स्कूलों में एक और दो बच्चों को दो-दो शिक्षक पढ़ा रहे हैं। जबकि, कई स्कूलों में बच्चे तो हैं लेकिन वहां कोई शिक्षक डेपुटेशन पर पहुंच गया तो ठीक है नहीं तो स्कूल राम भरोसे चले रहते है। अभिभावकों रमेश कुमार, राहुल, रजनी, मोनिका और मंजू सहित कई लोगों का कहना है कि सरकार लाहौल में बच्चों को बेहतर शिक्षा मुहैया करवाने के मामले में गंभीर नहीं है। लोगों ने सरकार से मांग की है कि जिला में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार किया जाए।