शीत मरुस्थल लाहौल घाटी के किसानों और बागवानों को इस वर्ष बागवानी मिशन के तहत मिलने वाले अनुदान का बजट न आने से तगड़ा झटका लगा है।
किसान-बागवानों ने उत्तम किस्मों के कृषि और बागवानों से कृषि से जुड़े संयंत्र तो खरीद लिए हैं लेकिन सरकार की ओर से अनुदान की राशि न मिलने से अब वे मुुश्किल में फंस गए हैं। किसान संयंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी का लाभ लेने के लिए विभाग के कार्यालयों का लगातार चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। गौरतलब है कि जिला बागवानी विभाग ने शिमला स्थित अपने निदेशालय के माध्यम से सरकार से चालीस लाख के अनुदान के लिए बजट मांगा था लेकिन विभाग को अभी तक यह बजट नहीं मिल पाया है। लाहौल के लोगों की आय का मुख्य जरिया कृषि और बागवानी ही है।
सरकार तथा विभाग की ओर से किसानों और बागवानों को इस वर्ष अनुदान की राशि न मिलने पर घाटी के सैकड़ों बागवानों के पॉवर टिल्लर, ट्रैक्टर, पावर स्प्रे आदि संयंत्र बैंक से कर्ज लेकर खरीदे हैं। अब अनुदान का लाभ मिलने से बागवान परेशान हैं। बागावान सुरेंद्र, श्याम लाल, विशन दास, राम सिंह और मनोहर लाल का कहना है कि वे पॉवर टिल्लर पर अनुदान का लाभ लेने के लिए बागवानी विभाग के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन उन्हें इस योजना का लंबे समय से लाभ नहीं मिला है। केलांग में तैनात बागवानी विभाग उपनिदेशक डॉ. सोनम ने बताया पॉवर टिल्लर पर सब्सिडी के लिए सैकड़ों किसानों और बागवानों के आवेदन पड़े हैं। उन्होंने कहा कि विभाग ने अपने निदेशालय को चालीस लाख की अनुदान राशि को लेकर पत्र प्रेषित किया था, लेकिन उन्हें तक कुछ भी नहीं मिला है।