इसे राजनीतिक दलों की अनदेखी कहें या फिर जनता का भाग्य। हिमाचल प्रदेश के अस्तित्व में आने के पचास वर्ष बीत जाने के बावजूद तीर्थन घाटी के दर्जनों गांव सड़क सुविधा से महरूम हैं। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के साथ सटे गांव शुंगचा, झलेरी, लाकचा, दारन, नाहीं, टलिंगा, पनिहार, तिंदर, रोपा जबकि नदी के दूसरे छोर पर बसे गांव शलिंगा, चिपनी, नाइणी, शील, शरूउर, परवाडी और गरूली आदि सड़क की राह ताक रहे हैं। लेकिन, यहां के बाशिंदों को सड़क नसीब नहीं हो पाई है। गांवों में सड़क न होने से विकास नहीं हो पाया है।
कुछ गांवों के लिए सड़कें तो निकाली जा रही हैं, लेकिन काम कछुआ गति से चल रहा है। घाटीवासी उदय शर्मा, खुशहाल चंद, नरोत्तम शर्मा, नोया राम, रामदास, पूर्व समिति सदस्य कांता देवी और दिले राम ने कहा कि उपमंडल के राजनेता अपने स्वार्थ साधने के सिवा कोई भी विकासात्मक करने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। जब वोट की बात आती है तो राजनेता लोगों को सड़कों के लिए झूठे आश्वासन देते हैं। लेकिन, चुनावों के बाद जनता से किए वादों को भूल जाते हैं। इस मामले को लेकर लोनिवि के सहायक अभियंता रोशन ठाकुर ने कहा कि ग्राम पंचायत शिल्ली तथा ग्राम पंचायत नोहांडा के गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने की योजना बन गई है। इसकी फॉरेस्ट क्लीयरेंस आनी बाकी है। उसके पश्चात सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। मशिहार सड़क में पुल को नावार्ड में डाला गया है। पूरा होने पर इसका लोकार्पण भी किया जाएगा।