लाहौल-स्पीति जिले के बाशिंदों को आज भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। घाटी के लोगों को महज एक अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए तीन हजार किराया खर्च करना पड़ रहा है।
जिले के क्षेत्रीय अस्पताल केलांग, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उदयपुर, शांशा और काजा में अल्ट्रासाउंड मशीनें तो हैं, लेकिन सरकार ने एक भी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं की है। रेडियोलॉजिस्ट न होने की वजह से ये मशीनें धूल फांक रही हैं। जिला अस्पताल में सात विशेषज्ञों के पद कई साल से खाली पड़े हैं, जिन्हें आज तक नहीं भरा गया है। इसको लेकर घाटी की जनता में रोष है। इतना ही नहीं, लाहौल घाटी के मरीजों को कई बार समय पर हेलीकॉप्टर नसीब नहीं होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कई मरीज तो आधे रास्ते में ही दम तोड़ जाते हैं। घाटीवासी राजेंद्र कुमार, तंजिन, प्रेम लाल और नोरबू ने कहा कि बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर आज तक जनजातीय क्षेत्र की जनता को नेताओं ने झूठे आश्वासन ही दिए हैं। बात चाहे भाजपा की हो या कांग्रेस की। चुनावी दौर के बीच यहां के नेता भोले भाले लोगों को गुमराह पर कुर्सी पर काबिज हो जाते हैं। बर्फबारी के बीच यहां की जनता की मुश्किलें बढ़ गई है। सरकारी अस्पताल में डेढ़ सौ रुपये में होने वाले अल्ट्रासांउड के लिए अब यहां के लोगों को हजारों खर्च करने पड़ रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि घाटी में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती जल्द की जाए।