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Kullu News: नौ महीने पहले आपदा ने छोड़ा था जख्म, अब उसी ने उजाड़ दिए घर

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कुल्लू। ग्राम पंचायत शिल्हानाल का बेधार गांव सितंबर 2025 की भीषण प्राकृतिक आपदा से सुरक्षित बच गया था। ग्रामीणों ने इसे भगवान की कृपा माना था, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि उसी आपदा की छोड़ी हुई एक निशानी नौ महीने बाद इतना बड़ा जख्म दे जाएगी। आपदा में क्षतिग्रस्त हुई सड़क ने बीते वीरवार को तीन महिलाओं की जान ले ली, जबकि नौ ग्रामीण घायल हो गए। हादसे ने पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया है।
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सबसे अधिक दर्द उस परिवार पर टूटा है, जिसने एक साथ अपनी दो पीढ़ियां खो दीं। हादसे में सास और छोटी बहू की मौत हो गई, जबकि बड़ी बहू गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है। परिवार के आंगन में जहां कभी हंसी गूंजती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। एक अन्य महिला की भी इस हादसे में जान चली गई, जिससे पूरे गांव में मातम का माहौल है।
नौ महीने पहले सितंबर 2025 में आई प्राकृतिक आपदा ने पंचायत के बागन, लगधारी और नारगी गांवों में भारी तबाही मचाई थी। अकेले बागन गांव में 40 से अधिक परिवार बेघर हो गए थे। उस समय बेधार गांव को सुरक्षित मानकर लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन आपदा से क्षतिग्रस्त सड़क की अनदेखी आखिरकार जानलेवा साबित हुई।
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कुल्लू-बढ़ई-बागन-पीज सड़क आपदा के बाद से ही कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त बनी हुई है। जीरो पॉइंट बढ़ई, जोखू नाला, अपर बढ़ई, बागन, कालरी बाई, शिल्हा, नारगी, लगधारी और शेलबाई तक सड़क की हालत बेहद खराब है। करीब सात किलोमीटर का यह हिस्सा लंबे समय से दुर्घटनाओं को न्योता दे रहा है। ग्रामीण लगातार सड़क की मरम्मत और सुरक्षा उपायों की मांग करते रहे, लेकिन न विभाग और न ही प्रशासन ने सुनी।
अब जब तीन घरों के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं और कई परिवारों की आंखों से आंसू नहीं थम रहे, तो गांव में एक ही सवाल गूंज रहा है, अगर सड़क समय पर दुरुस्त हो जाती, तो तीन जिंदगियां बच सकती थीं? बेधार गांव प्राकृतिक आपदा से तो बच गया, लेकिन उसी आपदा के जख्म ने नौ महीने बाद ऐसा दर्द दिया है, जिसे शायद यह गांव कभी नहीं भूल पाएगा।
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