पार्वती जल विद्युत परियोजना चरण-दो का निर्माण कर रही कंपनी ने 52 कामगारों को नौकरी से निकाल दिया है। छंटनी कर निकाले गए मजदूर सिउंड में परियोजना के निर्माणाधीन पावर हाउस के पास विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध कर रहे मजदूरों के साथ जिला परिषद अध्यक्षा कुल्लू रोहिणी चौधरी भी आ गई है। उन्होंने कंपनी की कार्रवाई को गैर जिम्मेदराना करार दिया है।
मजदूरों का आरोप है कि उन्हें कंपनी ने आनन-फानन में श्रम कानून का उल्लंघन कर निकाला है। हालांकि कंपनी इसे नियम के तहत की गई कार्रवाई बता रही है। वीरवार को जिप अध्यक्ष से मजदूरों ने कहा कि कपंनी ने श्रम कानून को ताक पर रखकर उन्हें बाहर किया है। फस्ट कम लास्ट गो की पॉलिसी पर अमल नहीं किया गया है न ही तय मानकों के अनुसार कंपनी में 70 फिसदी स्थानीय मजदूर बचते हैं।
मजदूर सतीश कुमार, बुद्धि सिंह, दिना नाथ, निर्मल मिश्रा, देव राज, ढाले राम, दुर्गा सिंह, एले राम, वीर सिंह, सेस राम, प्रेम देव, हेम राज, कुलदीप कुमार, जय देव, नूप राम, जितेंद्र, बालमुकुंद, दलीप कुमार, नरोतम, किशोरी लाल, नेस राम, और परस राम ने कहा कि वे कंपनी में तीन सालों से काम कर रहे हैं।
अधिकतर मजदूर परियोजना से प्रभावित-विस्थापित परिवार से संबंध रखते है। उन्होंने कहा कि उनकी छंटनी की सूची गेट पर चस्पा कर प्रबंधक भूमिगत हो गए हैं। इस कारण उन्हें जिप अध्यक्ष रोहिणी चौधरी से गुहार लगानी पड़ी। रोहिणी चौधरी ने परियोजना प्रबंधन को सिउंड बुलाकर श्रम कानून की पालना करने के आदेश दिए।
इस मौके पर मजदूरों ने प्रबंधन को पांच दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर सोमवार तक उन्हें वापस नहीं लिया गया तो परियोजना का काम बंद कर दिया जाएगा। इस मौके पर एनएचपीसी के चीफ इंजीनियर राकेश गुप्ता, साईट इंचार्ज सुधीर नेगी, रैला पंचायत की प्रधान खिम दासी, बालमकुंद, प्रीतम सिंह आदि उपस्थित रहे। उधर, एनएचनीसी के मुख्य अभियंता राकेश गुप्ता ने कहा कि कानून के तहत ही कार्रवाई की गई है। सभी मजदूरों को नियमानुसार उनका भुगतान भी किया है।