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जैव संसाधनों से खुलेंगे आर्थिक विकास के नए रास्ते : डॉ. संजय

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कुल्लू कॉलेज में तीन दिवसीय व्याख्यान कार्यशाला का हुआ समापन
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। राजकीय महाविद्यालय कुल्लू में जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण और शोध के विभिन्न पहलुओं पर आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यान कार्यशाला का समापन हुआ। वनस्पति विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में देश के विभिन्न महाविद्यालयों और संस्थानों से वनस्पति विज्ञान के स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
कार्यशाला के अंतिम दिन मुख्य अतिथि कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड, नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने जैव संसाधनों के उपयोग, जैव संभाव्यता अन्वेषण (बायोप्रॉस्पेक्टिंग) और जैव अर्थव्यवस्था (बायोइकोनॉमी) विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग कर आर्थिक विकास के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने पालमपुर में ट्यूलिप गार्डन की शुरुआत से जुड़े अनुभव भी विद्यार्थियों के साथ साझा किए।
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डॉ. संजय कुमार ने भारत में हींग की खेती शुरू करवाने की पहल और इससे जुड़े प्रयासों की भी जानकारी दी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. रितेश चौधरी ने विद्यार्थियों को डीएनए बारकोडिंग और बायोएडिट सॉफ्टवेयर की व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने जैविक नमूनों के अध्ययन में इन तकनीकों की उपयोगिता और उनकी भूमिका के बारे में बताया। कार्यशाला के समन्वयक डॉ. मान एस राणा ने बताया कि आयोजन में राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, प्रयागराज, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, नई दिल्ली और भारतीय विज्ञान अकादमी, बंगलूरू से जुड़े विशेषज्ञों ने भी विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। संवाद
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