भाषा विभाग कार्यालय में लंबे समय से पद खाली होने से प्रभावित हो रहे काम
कार्यक्रमों के संचालन के साथ लेखा-जोखा रखने में भी आ रही हैं दिक्कतें
अजय कुमार
कुल्लू। भाषा विभाग कुल्लू में न अधिकारी है और न ही अधीक्षक... ऐसे में कैसे बिना अधिकारियों के विभागीय कामकाज कैसे हो पाएंगे। लंबे समय से ये पद खाली होने से विभागीय कामकाज भी प्रभावित चल रहे हैं। विभाग का कामकाज महज एक लिपिक कर हवाले है।
गौर रहे कि भाषा विभाग कुल्लू के अधीन देवसदन, अटल सदन, लाल चंद प्रार्थी कलाकेंद्र भी आते हैं। इनमें आए दिन कोई न कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होता रहता है। अधिकारी न होने से इन कार्यक्रमों के संचालन और अन्य गतिविधियों को करवाने, इनका लेखा-जोखा रखने में भी दिक्कतें आ रही हैं। एक लिपिका विभागीय कामकाज को देखे या अटल सदन, देव सदन या लाल चंद प्रार्थी कलाकेंद्र का अतिरिक्त कार्यभार संभाले। यह कहना गलत नहीं होगा कि कुल्लू में सरकारी तंत्र बीमार चल रहा है।
दशहरा का लेखा जोखा भी
भाषा विभाग कुल्लू के पास अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा से संबंधित सांस्कृतिक गतिविधियों और अन्य लेखा-जोखा का भी कार्य है। इसमें दशहरा में आने वाले सैकड़ों देवी-देवताओं के नजराने का लेखा-जोखा और इनको ठहराने तथा इसकी व्यवस्था का जिम्मा भी है।
ये कर्मचारी हैं तैनात
भाषा विभाग कुल्लू में वर्तमान में एक रेगुलर लिपिक, तीन सफाई कर्मी, एक इलेक्टि्रशियन और एक आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं।
भाषा विभाग के कुल्लू कार्यालय में स्टाफ की कमी को लेकर निदेशालय को लिया गया है और जिला भाषा अधिकारी का अतिरिक्त कार्यभार मेरे पास ही है। जब जरूरी कार्य होता है, तब तब कुल्लू कार्यालय का दौरा करती हूं और कार्य निपटाने की कोशिश करती हूं, जिससे लोगों को परेशानी न हो।
- प्रोमिला गुलेरिया, भाषा अधिकारी, मंडी