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Kullu News: नगर निकायों की लापरवाही से गलियां बनीं डर का अड्डा

Sat, 08 Nov 2025 10:25 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू
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कुल्लू जिले में तीन साल में लावारिस कुत्तों ने छह हजार लोगों पर किया हमला
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लोग बोले- सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद जगी समस्या के समाधान की उम्मीद

गौरीशंकर
कुल्लू। लावारिस कुत्तों का आतंक सिर्फ एक प्रशासनिक समस्या नहीं, ये संवेदनहीन सिस्टम का आईना है। आंकड़े बताते हैं कि डर अब कुल्लू के हर मोहल्ले में घर कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने जवाबदेही तय करने की बात कही है। अब देखना है कि इंसानों की गलियों में इंसानियत कब लौटती है।
लावारिस कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लोगों में इस समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है। उम्मीद है कुत्ते के काटने के मामलों में कमी आएगी। इनकी संख्या में भी कमी देखने को मिलेगी। पिछले कुछ वर्षों में कुत्ताें के काटने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इससे निजात के लिए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में पिछले तीन साल में लावारिस कुत्तों ने 6 हजार लोगों पर हमला किया है। इन लोगों का अस्पतालों में उपचार किया गया। स्वास्थ्य विभाग में दर्ज मामलों को देखें तो 2022 से 2024 तक जिले में 5878 मामले सामने आए हैं। इस वर्ष को मिलाकर यह आंकड़ा 8 हजार से भी अधिक माना जा रहा है।
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जानकारों का मानना है कि यह आंकड़ा प्रशासनिक और नगर निकाय अधिकारियों की लापरवाही को उजागर करता है। इससे साबित होता है कि लावारिस कुत्तों से लोगों की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों ने कोई ठोस प्रयास नहीं किए। यह बात सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में की टिप्पणी में साफ तौर पर कही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन और नगर निकाय की व्यवस्था में इस मामले को लेकर गंभीर होने की जरूरत है।

हर साल बढ़ते गए आंकड़े
जिले में लावारिस कुत्तों के हमले के मामलों की बात करें तो वर्ष 2022 में 1637 मामले स्वास्थ्य विभाग के रिकाॅर्ड में दर्ज हैं। वर्ष 2023 में ये बढ़कर 1888 पहुंच गए। 2024 में आंकड़ों ने लंबी छलांग लगाई है और 2353 मामले अंकित किए गए।
लावारिस कुत्तों के बढ़ते आतंक को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। प्रशासन, नगर निकायों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए हरकत में आना पड़ेगा। - सुनील धीमान, कुल्लू
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लावारिस कुत्तों को लेकर आए फैसले को लेकर अगर प्रशासन और नगर परिषद गंभीरता से काम करते हैं तो निश्चित रूप से लोगों को इस समस्या से निजात मिल सकेगी। - तेज राणा, हनुमानी बाग
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