माता बूढ़ी नागिन बालू। दो अगस्त से शुरू होगा माता के अठारहे जाच मेला। संवाद
कुल्लू। जिला कुल्लू में श्रावण माह मेलों की धूम है। एक ओर जहां महादेव के दर्शन के लिए मंदिरों में भक्तों को तांता लगा है, वहीं ग्रामीण इलाकों में देवी-देवताओं के सम्मान में मेले चल रहे हैं। दो अगस्त को रघुपुर घाटी के बालू गांव में माता बूढ़ी नागिन का पारंपरिक अठारहे जाच (18 श्रावण) मेला शुरू होने जा रहा है। इसके लिए फनौटी और करशैईगाड़ पंचायतों के लोगों ने तैयारियां शुरू कर दी है।
मेले में जहां माता बूढ़ी नागिन का रथ देवालय से बाहर निकलेगा। इसके बाद मेला स्थल पर देव नृत्य होगा। दो दिनों तक रघुपुर घाटी ढोल, नगाड़ों, करनाल, नरसिंगों और शहनाई की स्वरलहरियों से गूंज उठेगी। मेले में देव संस्कृति के साथ पुरातन संस्कृति के भी दर्शन होंगे। सदियों पुराने अठारहे जाच मेले में माता बूढ़ी नागिन देव परंपरा को निभाएंगी।
मेले का आयोजन बालू गांव के साथ बलेहड़, लोट, घुहाटन, गनोचा गांव द्वारा किया जाता है। इसमें रघुपुर इलाके की फनौटी, करशैईगाड़, टकरासी और लगौटी पंचायतों के साथ मंडी जिला की बगड़ाथाच क्षेत्र के लोग भी भाग लेते हैं। देवी के कारदार ध्यान सिंह, मंदिर कमेटी के प्रधान दया राम ठाकुर, अशोक कुमार, गंगा राम, हीरा लाल, टेक सिंह और चमन लाल ठाकुर ने कहा कि माता बूढ़ी नागिन का अठारहे जाच बालू एक पारंपरिक मेला है। हर साल श्रावण माह की 18 प्रविष्टे को माता देवालय से बाहर निकलेगी और लोगों को अपना आशीर्वाद देंगी।