मलाणा में बाधित बिजली लाइन को दुरूस्त करने के लिए बिजली पोल को रस्से से खींचते मजदूर
कुल्लू। आपदा के बाद 28 दिनों से अंधेरे में डूबे मलाणा गांव को रोशन करने के लिए बिजली बोर्ड और मजदूर जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं। जहां चलना भी खतरे से खाली नहीं, वहां मजदूरों ने हिम्मत की मिसाल पेश कर खंभे पहुंचा दिए हैं। कई जगह तो खंभों को लगा भी दिया है। टूटे रास्तों से खंभों को रस्सी के सहारे पहुंचाया जा रहा है।
मलाणा में आपदा के कारण रास्ते और सड़कें पूरी तरह से टूट गई हैं। राशन भी मजदूरों के माध्यम से पहुंचाया गया। अब बिजली बोर्ड बिजली बहाल करने पर जुटा हुआ है। बादल फटने की घटना के बाद करीब 13 किलोमीटर क्षेत्र में बिजली की लाइन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। लाइन बिछाने में बिजली बोर्ड को समय लगना था। करीब सात किलोमीटर में मलाणा के पावर प्रोजेक्ट की लाइन है, जो ठीक है। इस लाइन का बिजली बोर्ड की ओर से सहारा लिया जाएगा। अन्य क्षेत्र में लाइन को बिजली बोर्ड की ओर से बिछाया जा रहा है।
प्रारंभिक तौर में बिजली के 70 खंभे लगाए जा रहे हैं। बिजली बहाली के लिए बोर्ड की ओर से ठेकेदार को निर्देश दिए गए हैं कि जल्द से जल्द काम पूरा किया जाए। हालांकि मलाणा के लिए सड़क जगह-जगह क्षतिग्रस्त है, ऐसे में बिजली के खंभे ले जाना और तारें बिछाना किसी चुनौती से कम नहीं है। बोर्ड के अधिकारियों का मानें तो अगले 10 से 12 दिनों के अंदर बिजली बहाल हो सकती है।
मलाणा पंचायत के प्रधान राजू राम ने कहा कि मलाणा में बिजली आपूर्ति बादल फटने के बाद से बंद है। सड़क और बिजली बाधित होने के कारण ग्रामीणों की मुश्किलें अभी तक कम नहीं हुई हैं। उन्होंने कहा कि मलाणा में ही दो पावर प्रोजेक्ट हैं, लेकिन ग्रामीणों को अंधेरे में रहना पड़ रहा है।
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मलाणा के लिए बिजली बहाली का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। बिजली बहाली के कार्य में तेजी लाने के लिए कहा गया है। मौसम अगर काम में खलल नहीं डालता है तो 15 सितंबर से पहले मलाणा के लिए बिजली बहाल कर दी जाएगी।
-विरेंद्र शर्मा, अधिशासी अभियंता, बिजली बोर्ड