पार्वती जल विद्युत परियोजना की टनल में रिसाव
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पार्वती जल विद्युत परियोजना चरण-तीन की हेडरेस टनल (एचआरटी) में बिहाली के पास एक बार फिर पानी का रिसाव शुरू हो गया है। टनल से रिसाव होने के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है। बढ़ते रिसाव ने परियोजना प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, ग्रामीण भी सहमे हुए हैं। टनल से पानी के रिसाव के कारण बिजली उत्पादन में भी गिरावट दर्ज की गई है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने वर्ष 2024-25 के लिए पार्वती पावर स्टेशन बिहाली का जो लक्ष्य तय किया था, उसे एनएचपीसी पूरा नहीं कर सका है। इसके चलते मंत्रालय ने परियोजना प्रबंधन को फटकार लगाई है। 520 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना की हेडरेस टनल पिछले नौ वर्षों से लीकेज की समस्या झेल रही है। सपांगनी की पहाड़ी में प्रोजेक्ट की टनल से पानी रिस रहा है।
इससे पावर हाउस की चारों टरबाइनों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, एनएचपीसी का तर्क है कि प्रदेश की कई जल विद्युत परियोजनाओं में इस वर्ष उत्पादन कम हुआ है, लेकिन इसी नदी पर बनी 100 मेगावाट की सैंज परियोजना में रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है, जिससे पार्वती परियोजना प्रबंधन पर सवाल खड़े हो गए हैं। टनल से बढ़ते रिसाव पर तलाड़ा पंचायत के प्रधान मोहर सिंह ने कहा कि दर्जनों परिवार खतरे की जद में आ गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान तय मानकों की अनदेखी की गई, जिससे अब पानी के चश्मे तेजी से फूट रहे हैं। मेहर सिंह कारदार, तीर्थ राम, महेंद्र सिंह, गुड्डू राम, नरेंद्र कुमार, रोशन लाल, मोहर सिंह और गंभीर सिंह ने बताया कि एनएचपीसी प्रबंधन स्थिति की गंभीरता को हल्के में ले रहा है और किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
एनएचपीसी ने किया खतरे से इन्कार
परियोजना के महाप्रबंधक प्रकाश चंद ने कहा कि टनल की लीकेज स्थिति सामान्य है। इससे न तो बिजली उत्पादन पर कोई असर पड़ा है और न ही ग्रामीणों के लिए कोई खतरा है।