निफ्ट कांगड़ा के डिजाइनर लाहौल की महिलाओं को रंग का प्रशिक्षण देते हुए।
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केलांग (लाहौल-स्पीति)। जैविक रंगों के साथ जल्द ही फैशन की दुनिया में लाहौल के पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद दस्तक देंगे। अभी तक लाहौली हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद दुनिया की पहुंच से दूर हैं। इन उत्पादों को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी कांगड़ा नई लुक के साथ फैशन की दुनिया में उतारने की तैयारी में है।
सिक्योर हिमालय इस पूरी कवायद में अहम भूमिका निभा रहा है। निफ्ट कांगड़ा के डिजाइनर स्थानीय महिलाओं को पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को आधुनिक बाजार की मांग के आधार पर तैयार करने के लिए प्रशिक्षण दे रहे हैं। डिजानर महिलाओं को ऊन के धागों को केमिकल की बजाय जैविक रंगों से रंगने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। सिक्योर हिमालय के लाहौल प्रभारी अभिषेक ने बताया कि इस अभियान के लिए उनकी संस्था ने निफ्ट कांगड़ा को यह काम सौंपा है। धागों में प्याज के छिलकों, घास व जड़ी-बूटियों को उबाल कर रंगने की बारीकियां सिख रहे हैं। बीते 27 मार्च को तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने उदयपुर में दो सप्ताह तक हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट पर चली कार्यशाला का शुभारंभ किया। निफ्ट कांगड़ा के डिजाइनर शिवानी और सहायक डिजाइनर गीता महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही हैं। स्थानीय महिलाओं को अपने पारंपरिक उत्पादों के डिजाइन में आंशिक बदलाव कर मौजूदा बाजार की मांग के अनुरूप जुराबें, शालें, दस्ताने, मफलर और टोपियां तैयार करने की विधि सिखा रही हैं। अभिषेक ने कहा कि अटल टनल खुलने के बाद इस तरह के उत्पादों की मांग बढ़ेगी, जिससे महिलाओं को अतिरिक्त आर्थिक फायदा मिलेगा। आने वाले दिनों में लाहौली हस्तशिलप और हथकरघा उत्पादों का इस्तेमाल फैशन की दुनिया में हो सकेगा।