केलांग (लाहौल-स्पीति)। लाहौल-स्पीति विधानसभा में कौन अगला विधायक होगा, इसका फैसला घाटी की महिलाएं करेंगी। घाटी में पुरुष के मुकाबले महिला वोटरों की संख्या अधिक है। ऐसे में सभी उम्मीदवारों की नजरें भी महिला मतदाताओं पर हैं। इस बार लाहौल-स्पीति में राजनीतिक उठापटक से विधानसभा उपचुनाव काफी रोचक होने वाला है।
लाहौल-स्पीति ये कांग्रेस ने 52 साल बाद महिला प्रत्याशी को सियासी पिच पर उतारा है। घाटी के गांवों की महिलाएं कई अहम फैसले लेने में समक्ष है। महिलाएं अपने-अपने गांव की महिला मंडलों की समूह में विचार-विमर्श के बाद ही कोई निर्णय लेती हैं और बाकायदा अमलीजामा भी पहनाती हैं। चाहे जंगलों को बचाने की बात हो या फिर जीव जंतुओं के अवैध शिकार की। इस पर भी घाटी की महिलाओं ने पाबंदी लगा रखी है। ऐसे में जहां लाहौल में जंगलों का दायरा बढ़ रहा है वहीं, वन्य जीव-जंतु रिहायशी इलाकों के आसपास घूमते हुए नजर आ रहे हैं।
अब देखना यह है कि इस बार के विधानसभा उपचुनाव में महिला मतदाताओं का क्या रुझान रहता है। लाहौल-स्पीति विधानसभा क्षेत्र में कुल 25,049 मतदाता हैं। इसमें 12,500 पुरुष हैं, जबकि 12,549 महिला मतदाता हैं। कुल मिलाकर लाहौल-स्पीति में 49 महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाता से अधिक है। जिले के कुल मतदाताओं में 339 वरिष्ठ नागरिक और 285 दिव्यांग वोटर भी हैं।
लाहौल-स्पीति विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने महिला प्रत्याशी को चुनावी दंगल में उतारा है तो वहीं उनके सामने पूर्व विधायक रवि ठाकुर और पूर्व मंत्री डॉ. राम लाल मारकंडा की भी चुनौती है। हालांकि घाटी की गली और मोहल्ले में महिला प्रत्याशी को लेकर महिला मतदाताओं में बड़ी चर्चाएं हो रही है। अब महिलाएं किसे अपना विधायक चुनती हैं, इसका पता चार जून को चुनाव के परिणाम से चलेगा।