रथयात्रा में ये देवी-देवता भगवान रघुनाथ के साथ चले
इस दौरान भगवान रघुनाथ के साथ बिजली महादेव, हिडिंबा माता, देवता अजय पाल, पिरडी महादेव, धूम्बल नाग, जवाणी महादेव, वीरनाथ समेत करीब 100 देवी-देवता भी साथ चले। वहीं, हजारों लोगों ने भी रथ को खींचकर पुण्य कमाया। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता समेत एक लाख लोग अलौकिक नजारे की साक्षी बने। रथयात्रा के दौरान देवी-देवताओं की मौजूदगी ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। करीब 300 देवी-देवताओं के ढालपुर पहुंचने के साथ ही देव परंपरा के इस अनूठे उत्सव की रौनक बढ़ गई। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस संजय करोल, हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल भी मौजूद रहे।
सात दिन तक ढालपुर में रहेगी रौनक
21 से 27 अक्तूबर तक चलने वाले अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव में हर दिन धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां होंगी। ढालपुर में देवी-देवताओं के अस्थायी शिविर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहेंगे। प्रशासन और महोत्सव समिति की ओर से आयोजन को सुचारु बनाने के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं। रथयात्रा के साथ शुरू हुए उत्सव ने कुल्लू घाटी को एक बार फिर आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया है।
पुलिस पहरे में श्रृंगाऋषि और बालू नाग
दशहरा महोत्सव में दूर विवाद के चलते अधिष्ठाता देवता श्रृंगा ऋषि व बालू नाग अस्थायी शिविर में पुलिस पहरे में रहे। हालांकि, दोनों देवता सुबह लाव लश्कर के साथ भगवान रघुनाथ के मंदिर रघुनाथ पहुंचे थे। इसके बाद दोनों देवताओं को रथयात्रा तक पुलिस पहरे में रहे।
राज्यपाल कविंद्र गुप्ता बोले- श्रीराम का जीवन सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की देता है प्रेरणा
प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने बुधवार ढालपुर में सप्ताह भर चलने वाले अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। इसके साथ ही प्रदेश के प्रमुख सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजनों में से एक इस उत्सव का आगाज हुआ। राज्यपाल ने कहा कि कुल्लू दशहरा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध देव संस्कृति, लोक परंपराओं, सामूहिक आस्था और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। देव संस्कृति और लोक संस्कृति का अनूठा संगम कुल्लू दशहरा को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है और इसे देश के सांस्कृतिक मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाता है। उन्होंने कहा कि परंपराएं केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए सामर्थ्य एवं मार्गदर्शन का स्रोत भी हैं। राज्यपाल ने कहा कि इन परंपराओं का संरक्षण करना और इन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।