पहलगाम हमले के बाद लगातार गिर रहा था घाटी का पर्यटन कारोबार
ऑपरेशन सिंदूर के बाद 80 फीसदी तक रद्द हो गई है होटलों की बुकिंग
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। पर्यटन के लिए प्रसिद्ध कुल्लू घाटी में पिछले 20 दिन से पर्यटन सीजन मंदा चल रहा है। अभी तक होटलों की ऑक्यूपेंसी 50 फीसदी से अधिक नहीं बढ़ पाई है।
भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के कारण पर्यटन कारोबार में भारी कमी आई है। 22 अप्रैल को पहलगाम में 26 पर्यटकों पर हुए आतंकवादी हमले के बाद पर्यटकों की संख्या 40 से 50 फीसदी घट गई है। मई में पर्यटन सीजन के गति पकड़ने की उम्मीद थी, मगर कारोबार स्थिर रहा। छह मई की रात को भारत सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू कर दिया। इसका भी पर्यटन कारोबार पर असर पड़ा। घाटी में पहले जो 2,500 के आसपास पर्यटक वाहन रोज आ रहे थे, वे 1500 से 1700 तक सिमट गए हैं। भारत-पाकिस्तान युद्ध के बीच घाटी की 70 से 80 फीसदी बुकिंग रद्द होने से कारोबारियों को झटका लगा है।
इसका असर घाटी के सोझा, तीर्थन, जीभी, मणिकर्ण, मनाली के साथ लाहौल घाटी में पड़ा है। बता दें कि जिले में 15 अप्रैल से पर्यटन सीजन शुरू हो जाता है। इस दौरान एक सप्ताह तक अच्छी खासी संख्या में सैलानी कुल्लू-मनाली और लाहौल की वादियों में पहुंचे, मगर 22 अप्रैल को पहलगाम की घटना के बाद कारोबार बढ़ने के बजाय लगातार घटता गया। मनाली की बात करें तो वीकेंड में 2,000 से अधिक पर्यटक वाहन आ रहे थे, लेकिन अब 1000 से 1100 वाहनों की एंट्री हो रही है। अब भारत-पाकिस्तान युद्ध में सीजफायर होने से हजारों पर्यटन कारोबारियों को पर्यटन सीजन में पंख लगने की उम्मीद है।
युद्ध विराम से समूची घाटी के पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पिछले चार से पांच दिन में ही 90 प्रतिशत बुकिंग रद्द हो गई हैं। कारोबारियों के लिए एक बुरे सपने जैसा था। युद्ध जैसे हालात में कोई भी परिवार सहित छुट्टियां मनाने के लिए पहाड़ों का रुख नहीं कर रहा था। - गौतम ठाकुर,पर्यटन कारोबारी, मनाली
सीजफायर से जिले के पर्यटन कारोबार के गति पकड़ने की उम्मीद है। पहलगाम हमले के बाद से पर्यटन कारोबार में लगातार गिरावट आई है। पिछले 20 दिन से होटलों और होमस्टे में 50 फीसदी की कमी आई है। कई सैलानियों ने अपनी बुकिंग भी रद्द की। अब सीजफायर होने से पर्यटन बढ़ने की उम्मीद है। - राजेंद्र प्रकाश, अध्यक्ष सोझा टूरिज्म एसोसिएशन