सेब पेटियों के पंजीकरण के लिए एपीएमसी ने दोबारा सक्रिय की बजौरा चेकपोस्ट
40 लाख का अतिरिक्त राजस्व भी जुटाया, तैयार हो रहा सेब उत्पादन का आंकड़ा
गौरीशंकर
कुल्लू। जिले में सेब उत्पादन का वास्तविक आंकड़ा सामने लाने के लिए एपीएमसी ने करीब आठ साल बाद बजौरा चेकपोस्ट को दोबारा सक्रिय कर दिया है। बाहरी राज्यों की मंडियों में सीधे भेजी जा रहीं सेब पेटियों का अब पंजीकरण हो रहा है।
इससे न केवल उत्पादन का पूरा हिसाब मिलेगा, बल्कि एपीएमसी ने इस बार 40 लाख रुपये का अतिरिक्त राजस्व भी जुटाया है। सिर्फ कुल्लू घाटी से ही दूसरे राज्यों की मंडियों में सीधे जाने वाली सेब की पेटियों का आंकड़ा दर्ज किया गया है। इस बार घाटी से 13 लाख 14 हजार 85 पेटियां सेब की सीधे बाहरी मंडियों में भेजी गई हैं। एपीएमसी की चौकी में दर्ज इन आंकड़ों में 10 किलोग्राम की 57254 और 20 किलोग्राम की 12 लाख 56 हजार 831 पेटियां शामिल हैं। गौरतलब है कि 2015-16 तक भी बजौरा ने चेकपोस्ट थी। फोरलेन के निर्माण कार्य के चलते चेकपोस्ट बंद हो गई थी। इससे एपीएमसी को भी हर साल लाखों रुपये के राजस्व से वंचित रहना पड़ रहा था।
चालीस लाख रुपये का राजस्व जुटाया
एपीएमसी कुल्लू एवं लाहौल-स्पीति ने बजौरा में स्थापित चेकपोस्ट से होकर गुजरने वाली सेब की गाड़ियों से प्रति पेटी 3 रुपये शुल्क वसूला है। इसके चलते एपीएमसी ने 40 लाख का राजस्व अतिरिक्त जुटाया है। यह एपीएमसी के लिए फायदेमंद साबित हुआ है। दूसरी तरफ कुल्लू घाटी में होने वाले सेब उत्पादन का वास्तविक आंकड़ा भी तैयार हो रहा है।
बंजार, आनी और निरमंड अभी व्यवस्था नहीं
बंजार, आनी और निरमंड क्षेत्र से सब्जी मंडियों को छोड़कर सीधे बाहरी सब्जी मंडियों में जा रहे सेब का रिकाॅर्ड रखने और उससे शुल्क लेने का अभी तक कोई प्रावधान नहीं है। इस कारण अभी इन क्षेत्रों के सेब उत्पादन का भी वास्तविक आंकड़े का रिकॉर्ड नहीं बन पा रहा है। न ही एपीएमसी को इसका शुल्क मिल रहा है।
बजौरा में चेकपोस्ट स्थापित की गई है। इसमें 40 लाख का राजस्व जुटाया है। यह पोस्ट वर्षों पहले बंद हो गई थी। अब इसे फिर स्थापित किया है। इससे सेब उत्पादन का वास्तविक रिकाॅर्ड भी तैयार होगा। - दीक्षित जरियाल, सचिव, एपीएमसी
जिले में स्थानीय के अलावा बाहरी मंडियों में जाने वाले सेब को रिकाॅर्ड में लाने के लिए बजौरा के बाद आनी और निरमंड में भी चेकपोस्ट लगाने पर विचार किया जाएगा। इससे उत्पादन का पूरा पता चलेगा, वहीं एपीएमसी को राजस्व भी जुटेगा। - राम सिंह मियां, चेयरमैंन एपीएमसी कुल्लू एवं लाहौल स्पीति