बंजार में किसान सभा के सदस्य पुलता फूंकते हुए।
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कुल्लू। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हिमाचल किसान सभा और सीआईटीयू ने कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किए। छोटे स्तर पर हुए प्रदर्शनों में किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ केंद्र सरकार के प्रति रोष प्रकट किया गया। अखिल भरतीय किसान संघर्ष समिति के आह्वान पर खराहल क्षेत्र, शारनी, नग्गर ब्लॉक, सैंज, बजौरा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अंबानी और अदानी के पुतले भी जलाए।
हिमाचल किसान सभा के राज्य सहसचिव होतम सोंखला कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में चर्चा किए बगैर ही अध्यादेश लाकर तीन कृषि कानूनों को पास किया है। ये कानून किसानों के हितों के विरुद्ध हैं। देश के पूंजीपतियों को फायदा दिलाने के लिए यह कानून लगाए हैं। इन कानूनों के चलते देश में सरकारी मंडियों का अस्तित्व समाप्त होगा। मंडियां समाप्त होने से पूंजीपतियों और कंपनियां मनमानी कर सकेंगी।
ठेका खेती कानून से किसान और कंपनी के बीच विवाद होने पर किसानों को न्यायालय जाने का अधिकार नहीं रहेगा। ऐसे में किसानों का शोषण बढ़ेगा। उन्होंने मांग की कि तीनों किसान विरोधी कानूनों को वापस लिया जाए। अगर सरकार तीनों किसान विरोधी कृषि बिलों को निरस्त नहीं करती तो 8 दिसंबर को भारत बंद के आह्वान पर जगह-जगह प्रदर्शन किए जाएंगे। इस दौरान जिला महासचिव नारायण चौहान, कुल्लू ब्लॉक सचिव खेम चंद, सीआईटीयू के पूर्व अध्यक्ष भूप सिंह, गोविंद भंडारी, राम चंद आदि मौजूद रहे।