सैंज (कुल्लू)। सैंज घाटी की भलाहण-दो पंचायत जौली नाला का रौद्र रूप देखकर ग्रामीण सहम गए हैं। इससे पहले लोगों ने इस नाले का विकराल रूप नहीं देखा था। बुधवार सुबह करीब तीन बजे नाले में पानी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। गांव के एक युवक ने पड़ोसियों को फोन किया लेकिन किसी ने नहीं उठाया। इस पर युवक ने चिल्लाना शुरू कर दिया। इसकी आवाज सुनकर लोगों की नींद खुली। जब बाहर पहुंचे तो नाला पूरे उफान पर था।
लोगों ने बरसात में कभी कभार आने वाले इस नाले से घर, खेत और संपत्ति को बचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए थे। बताया जा रहा है कि जौली नाले के ऊपर स्लेटों की खानें है। इन खानों का मलबा जौली नाले में फेंका जाता है। नाले का बहाव बढ़ने से यह मलबा गांव की तरफ आ गया और नाले ने रौद्र रूप धारण कर लिया।
गांव के पीछे दो मैदान न होते तो ग्रामीणों का सब कुछ तबाह हो चुका होता। गांव तक पहुंचने से पहले ही खेल मैदानों में नाले का मलबा फैल गया। ग्रामीण जीवन लाल ने बताया कि बुधवार देर शाम से इलाके में बारिश हो रही थी। लेकिन खतरे जैसी कोई बात नहीं थी। पूरे गांव के लोग रात को गहरी नींद में सोए थे।
गनीमत यह रही कि नाले में आया मलबा गांव के साथ लगते मैदानों में फैल गया। इससे ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। इसके बाद लोग सुबह तक नहीं सो सके। पूर्व उप प्रधान चमन लाल, महेंद्र सिंह, दुनी चंद, लुदर चंद और अनूप राम ने बताया कि नाले से बचने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे और न ही कभी इस नाले का इतना विकराल रूप देखा। नाले के उफान के साथ मैदान में पत्थरों के ढेर लग गए। गांव के करीब तीन दर्जन परिवारों के डरे सहमे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों ने खुले आसमान के नीचे खेतों शरण ली। पंचायत के प्रधान पूर्ण चंद ने बताया कि गांव की सुरक्षा के लिए अब इंतजाम करने की आवश्यकता है। डीएफओ पार्वती ऐश्वर्य राज ने कहा कि इस क्षेत्र में हो रहे खनन की जांच होगी। अवैध तरीके से मलबा फेंकने वालों पर कार्रवाई होगी। एसडीएम बंजार हेम चंद ने कहा कि नुकसान का आकलन करने के लिए राजस्व विभाग की टीम मौके पर भेजी गई है। संवाद