डर के साये में रह रहे ग्रामीण, बोले- नदियों का जलस्तर बढ़ने से बढ़ जाता है खतरा
बाढ़ की चपेट में आ गया है पैदल पुल, सरकारी और निजी भूमि का कटाव भी जारी
संजय कुमार
भुंतर (कुल्लू)। ब्यास और पार्वती का संगम जहां आस्था का केंद्र है, वहीं जिया गांव के लिए यही संगम हर साल तबाही की वजह बनता जा रहा है।
दो नदियों के बीच बसे इस गांव का अस्तित्व खतरे में है लेकिन सुरक्षा के इंतजाम अब तक सिर्फ फाइलों तक सीमित हैं। ब्यास और पार्वती नदी के संगम पर स्थित जिया गांव के ग्रामीण रोजाना डर के साय में रहने को मजबूर हैं।
हालांकि, बरसात के दिनों में दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ने से गांव को खतरे की जद में आ जाता है। गांव को जोड़ने वाला पैदल पुल भी बाढ़ की चपेट में आ गया है। गांव में सरकारी और निजी भूमि का कटाव भी जारी है। ग्रामीण सरकार और प्रशासन से गांव को बचाने की मांग कई बार कर चुके हैं लेकिन अभी तक सुरक्षा की दृष्टि से कोई कार्य नहीं हो पाया है। इससे ग्रामीणों में सरकार और प्रशासन के प्रति रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि पार्वती नदी गांव के अलावा हाइवे-03 पर बने दो फ्लाईओवर को भी नुकसान पहुंचा रही है। साल 2023 में बरसात के दिनों में दोनों नदियों में आई बाढ़ से गांव में पांच से छह घर बहने के अलावा भूमि कटाव हुआ था और गांव में बाढ़ का मलबा घुस गया था। साल 2024 में ऐतिहासिक गांव में परियोजना का बांध टूटने से पार्वती नदी का जलस्तर बढ़ गया था। इससे गांव खतरे में पड़ गया था। साल 2025 में बरसात के दिनों में ब्यास और पार्वती नदी ने दोबारा गांव में तबाही मचाई है। हर साल हो रहा नुकसान ग्रामीणों के लिए आफत बना हुआ है। इस संबंध में एसडीओ ललित ठाकुर ने कहा कि कुछ क्षेत्र में क्रेटवायर लगाई जा रही है। गांव दोनों ओर से नदियों से घिरा है। गांव को बचाने की दिशा भी जो भी निर्देश होंगे, उन पर काम किया जाएगा।
कई बार दिए प्रस्ताव, अमल नहीं
ग्राम सभा में गांव को बचाने के लिए ब्यास और पार्वती नदी के किनारे सुरक्षा दीवार लगाने के प्रस्ताव पारित किए गए हैं। यह प्रस्ताव कई बार प्रशासन को सौंपे गए हैं लेकिन इन पर अमल नहीं हुआ है। भुंतर, हाथीथान आदि क्षेत्रों में तटीकरण किया गया है लेकिन जिया गांव की सुध नहीं ली जा रही है। -संजू पंडित, पूर्व प्रधान, ग्राम पंचायत जिया
तटीकरण की योजनाएं नहीं चढ़ी सिरे
जिया गांव के अस्तित्व को लगातार खतरा बना हुआ है। दो नदियों के बीच स्थित गांव में जलस्तर बढ़ने से पानी घरों में घुस जाता है। भूमि का कटाव जारी है और कई घर बाढ़ में बह गए हैं। बावजूद इसके ग्रामीणों की सुरक्षा के इंतजाम सरकार और प्रशासन नहीं कर रहे हैं। -वीर सिंह ठाकुर, पूर्व बीडीसी सदस्य
आस्था का केंद्र है जिया संगम
जिले के देवी-देवताओं और लोगों के लिए जिया संगम स्थल आस्था का केंद्र है। वहां दो नदियों ब्यास और पार्वती का संगम होता है। इस स्थल पर 150 से अधिक देवी-देवता शाही स्नान करते हैं। इसके अलावा जिला वासी भी हजारों की संख्या में आस्था की डुबकी लगाते हैं लेकिन बाढ़ में पैदल पुल बह जाने के बाद अब तीन किलोमीटर का अतिरिक्त सफर कर संगम स्थल पर पहुंचना पड़ता है।