कुल्लू में साहित्य उत्सव का शुभारंभ के मौके पर पहुंचे साहित्यकार।-संवाद
कुल्लू। बहु उद्देश्यीय भवन में शुक्रवार को हिमतरू संस्था, प्रशासन तथा भाषा एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय कुल्लू साहित्य उत्सव का शुभारंभ हुआ। देश के प्रतिष्ठित कवि-साहित्यकार अनूप सेठी ने कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली के प्रोफेसर डॉ. मिलाप चंद शर्मा, चंबा से संबद्ध पर्यावरण प्रेमी रतन चंद और चर्चित साहित्यकार सैनी अशेष ने अपने विचार रखे। डॉ. मिलाप चंद ने बताया कि हिमालय पूरे विश्व के पर्यावरण को निर्धारित करता है, इसलिए हिमालय के पर्यावरण को संरक्षित करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। चार दशक पूर्व हिमाचल प्रदेश की ज्यादातर आबादी नदी-नालों से दूर थी, लेकिन पैसे कमाने के लोभ में लोगों ने नदी-नालों और हाईवे से साथ आबादी बसाना शुरू किया, जिसके परिणाम आज हमें भुगतने पड़ रहे हैं।
1874 से पूर्व कुल्लू घाटी में कोई भी गांव या आबादी नदी-नालों के समीप नहीं दिखती थी। हिमालय में पानी के स्रोत जल विहीन होने वाले हैं। इस ओर हमें जागरूक होने की अधिक आवश्यकता है। उन्होंने हिमाचल वासियों को स्विट्जरलैंड मॉडल अपनाने का सुझाव दिया।
कुल्लू साहित्य उत्सव समिति के अध्यक्ष डॉ. निरंजन देव शर्मा, हिमतरु के अध्यक्ष रमेश पठानिया, कुल्लू साहित्य उत्सव समिति के अध्यक्ष डॉ. निरंजन देव शर्मा, हिमतरु के सलाहकार युवराज बौध, सचिव किशन श्रीमान आदि मौजूद रहे। संवाद