हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह बोले अभी और खतरा
प्रदेश सरकार के पास फंड नहीं, केंद्र से मदद की दरकार
ऐसा ही रहा तो आने वाला समय और खतरनाक होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। हिमालयी क्षेत्र को असंवेदनशील विकास मॉडल ने खतरे में डाल दिया है। काफी समय से प्रदेश में ऐसा विकास हो रहा है जिसका कोई वैज्ञानिक मॉडल नहीं है। इसका नतीजा यह हुआ कि हिमाचल के साथ जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में व्यापक तबाही देखने को मिल रही है।
हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने कुल्लू में पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि साल 2025 का मानसून पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के लिए गंभीर चेतावनी बनकर आया है। प्रदेश में जहां 417 लोगों की मौत हुई और 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान दर्ज किया गया। इसके पीछे सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं, मानव निर्मित अवैज्ञानिक तरीके से बनाए गए चार-लेन सड़क, सुरंग, बांध और हाइड्रो परियोजनाएं भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि टनल बनने से मलबा ऐसी जगह डंप किया गया जो तबाही लेकर आया है। वनों को खत्म करने का काम किया गया है।
ऐसे में आने वाले समय में हिमालयी क्षेत्र के लिए अध्ययन करके ही विकास की योजनाओं का मॉडल बनाना होगा। उन्होंने कहा कि हाल ही में आई आपदा से प्रभावित लोगों को अभी तक राहत नहीं मिल पाई है और प्रदेश सरकार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है जबकि केंद्र से सहयोग नहीं मिल पा रहा है। केंद्र सरकार को भी प्रदेश को आपदा ग्रस्त प्रदेश घोषित कर प्रदेश की मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से प्रदेश और केंद्र सरकार प्रभावितों की मदद नहीं कर रही है। इससे अब प्रदेश के लोगों को आपस में मिलकर एक दूसरे की मदद करनी चाहिए। उनके साथ इस दौरान सेव लाहौल स्पीति के महासचिव अजेय कुमार, लोकतंत्र संगठन के अध्यक्ष महिमन चंद्र भी उपस्थित रहे।