अब हिमाचली टोपी में बढ़ा कृत्रिम कलगी का ट्रेंड
वन एवं वन्यजीव विभाग ने दिया है प्रशंसा पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। हिमाचल के राज्य पक्षी मोनाल के संरक्षण में इंद्रजीत की पहल कारगर साबित हुई है। कभी मोनाल के पंखों की टोपी पर सजने वाली कलगी की जगह अब कृत्रिम कलगी टोपी पर दिखती है। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी में कृत्रिम कलगी लगाने की होड़ है। कुल्लवी और हिमाचली टोपी में चांदी की तो कोई सोने की कलगी लगाना पसंद कर रहा है।
एक दशक पहले तक टोपियों में मोनाल के पंखों की कलगी होती थी। हिमाचली लोकगायक इंद्रजीत ने अपने गीतों के माध्यम से कृत्रिम कलगी लगाने की सोच को रखा और इसे लोगों ने अपनाया। नतीजा यह है कि दुर्लभ वन्य जीव मोनाल का संरक्षण इस सोच से संभव हो सका। लोकगायक इंद्रजीत को इस सराहनीय कार्य के लिए वन एवं वन्यजीव विभाग की ओर से प्रशंसा पत्र भी प्रदान किया जा चुका है। गौर रहे कि हिमाचली लोकगायक इंद्रजीत कुल्लू जिले से संबंध रखते हैं। वह राज्य की लोक संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने लोकगीतों के माध्यम से हिमाचली परंपराओं, पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्य यंत्रों और पहाड़ी जीवन शैली को व्यापक जनमानस तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में गीत पाखली माणु की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मोनाल पक्षी की असली कलगी के स्थान पर कृत्रिम कलगी को लाखों लोगों ने अपनाया। इसका प्रभाव इतना व्यापक रहा कि इससे मोनाल पक्षी के संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिली। उन्होंने कहा कि हमें इस तरह के जागरूकता भरे कार्यों में अपनी भूमिका अदा करनी चाहिए।