प्रशासन और विशेषज्ञ मिलकर निकालेंगे बाढ़ का खतरा कम करने के लिए समाधान
बिजली प्रोजेक्ट बनने के बाद गड़सा नाला की बाढ़ से कई बार हो चुका है नुकसान
आपदा के समय इस साल नाले में बहकर आया था लकड़ी का भारी-भरकम जखीरा
बलदेव राज
कुल्लू। गड़सा घाटी में कई बार तबाही मचाने वाले नाले को अब आईआईटी मंडी के वैज्ञानिक अध्ययन के तहत सुरक्षित बनाने की योजना बनाई जा रही है।
प्रशासन और विशेषज्ञ मिलकर बाढ़ के खतरे को कम करने और ड्रेजिंग जैसी जरूरी कार्रवाईयों का नक्शा तैयार करेंगे। जिला आपदा प्रबंधन के तहत गड़सा नाला पर आईआईटी मंडी के सहयोग से विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। अध्ययन में बाढ़ का खतरा कम करने के समाधान के साथ अन्य कार्य किए जाएंगे। गड़सा नाला का प्रशासन की ओर से विभागों के साथ मिलकर निरीक्षण किया जाएगा। देखा जाएगा कि गड़सा नाला में कौन-कौन सी जगहों पर बाढ़ नियंत्रण का कार्य जरूरी है। यह भी देखा जाएगा कि ड्रेजिंग की जरूरत कहां है।
गौर रहे कि वर्ष 2025 में गड़सा नाला में आई बाढ़ से भारी नुकसान हुआ था। इससे पहले भी इस क्षेत्र में बादल फटने से आई बाढ़ में काफी नुकसान हुआ था। बीते दिनों गड़सा में आयोजित सरकार गांव के द्वार कार्यक्रम में घाटी के लोगों ने गड़सा से लेकर बहुगुणा तक क्षेत्र को एनएचपीसी के अधीन देने की बात रखी थी। हालांकि, यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि प्रशासन की पहल का लोगों को क्या फायदा मिलेगा। वर्ष 2025 की आपदा में गड़सा घाटी का एक वीडियो वायरल हुआ था। बाढ़ के बाद बहती कई टन लकड़ियां भारी मात्रा में आई थीं। यह वीडियो सबके लिए चर्चा का विषय बन गया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई थी।
प्रोजेक्ट बनने के बाद सबसे अधिक तबाही गड़सा घाटी में हुई है। इसके लिए लंबे समय की विस्तृत योजना बनाने की जरूरत है। इसके बाद इस दिशा में प्रशासन और एनएचपीसी को कार्य करने के लिए कहा गया है। - सुंदर सिंह ठाकुर, विधायक सदर
जल्द विभागों के अधिकारियों के साथ मिलकर मौके पर निरीक्षण किया जाएगा। बाढ़ नियंत्रण कार्य की कहां जरूरत है आदि बिंदुओं पर निरीक्षण अगले सप्ताह से शुरू किया जाएगा। - निशांत कुमार, एसडीएम सदर, कुल्लू