हवा में उड़ गए बिजली परियोजना प्रबंधन के पानी छोड़ने से पहले लोगों को सूचना देने के दावे
जून 2014 में भी दो दर्जन से ज्यादा इंजीनियरिंग के छात्रों को बहा ले गया था लारजी डैम का पानी
रोशन ठाकुर
कुल्लू। बिना सूचना दिए छोड़ जाने वाले बांध के पानी में कब तक आम लोगों की अनमोल जिंदगी बहती रहेगी। इस सवाल का जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है। हर बार घटना होने के बाद बड़े-बड़े दावे और वादे तो किए जाते हैं, लेकिन व्यवस्था धीरे-धीरे पुराने ढर्रे पर ही लौट आती है।
जून 2014 को भी लारजी डैम में छोड़े पानी में दो दर्जन से इंजीनियरिंग छात्र बह गए थे। जुलाई 2023 में डैम के पानी ने सैंज के आधार बाजार का नामोनिशान मिटा दिया था। बावजूद इसके परियोजना प्रबंधन सबक नहीं ले रहे हैं। जिले में सैंज से लेकर मनाली तक कई बिजली परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। जगह-जगह डैम बनाए गए हैं। परियोजना प्रबंधन की ओर से डैम का पानी छोड़ने से पहले लोगों को सूचित करने के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। उनकी लापरवाही आम लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। ऐसे में जिले में कब तक डैम से छोड़े जा रहे पानी से सैलानियों और आम लोगों की जिंदगी बहती रहेगी।
बिना सूचना दिए डैम का पानी छोड़ना अपराध
वीरवार को मणिकर्ण घाटी के बरशैणी में एनएचपीसी के डैम से बिना सूचना दिए पानी छोड़ दिया गया। इससे पार्वती नदी का जलस्तर बढ़ गया। इसमें दो लोगों के बहने की आंशका है। उत्तर प्रदेश के रहने वाले एक व्यक्ति का शव बरामद कर लिया गया है। हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने कहा कि डैम से बिना सूचना पानी छोड़ना अपराध है। इससे न केवल निजी और सरकारी संपत्ति का नुकसान हो रहा है, बल्कि लोगों की जान भी जा रही है। सैर-सपाटा करने के लिए आए सैलानी इसकी भेंट चढ़ रहे हैं।
परियोजना प्रबंधन पर दर्ज हो आपराधिक मामला : गुमान
गुमान सिंह ने कहा कि डैम से बिना सूचना के पानी छोड़ने की कई घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन किसी पर कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। 2023 में सैंज बाजार आधा बह गया। मामला दो साल से सब ठंडे बस्ते में है। डैम से बिना सूचना पानी छोड़ने पर परियोजना प्रबंधन पर आपराधिक मामला दर्ज किया जना चाहिए। डैम सेफ्टी एक्ट की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।