लाहौल घाटी की मयाड़ साइड से हिमालयन आइबेक्स का एक बेहद खूबसूरत और दुर्लभ वीडियो सामने आया है, जो पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रहा है। वीडियो में आइबेक्स का झुंड मयाड़ नाले में पानी पीता दिखाई दे रहा है। पानी पीने के बाद ये वन्यजीव एक-एक कर लंबी छलांग लगाते हुए नाले के दूसरे किनारे पर पहुंचते नजर आ रहे हैं। स्थानीय युवा अमीर जस्पा ने इस पूरे दृश्य को अपने मोबाइल कैमरे में कैद किया है।
ऊंची चोटियों पर जमने लगा पानी, निचले इलाकों में उतर रहे आइबेक्स
11 अक्तूबर को घाटी में हुई बर्फबारी के बाद लाहौल की ऊंची चोटियों पर ठंड बढ़ गई है। ऊंचाई वाले कुछ क्षेत्रों में झरनों का पानी भी जमना शुरू हो गया है। ऐसे में प्राकृतिक जल स्रोतों के जमने के कारण हिमालयन आइबेक्स को पीने के पानी की तलाश में नीचे नदी-नालों के किनारे उतरना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, आने वाले दिनों में जैसे-जैसे ठंड बढ़ेगी, पहाड़ों पर पानी जमने की प्रक्रिया तेज होगी। ऐसे में आइबेक्स के नदी-नालों के आसपास दिखाई देने की संभावना भी बढ़ सकती है।
मनाली-लेह मार्ग पर भी दिख सकते हैं आइबेक्स
मनाली-लेह मार्ग पर दालंग से दारचा और उससे आगे तक पर्यटक सड़क किनारे तथा नदी-नालों के आसपास हिमालयन आइबेक्स देख सकते हैं। स्थानीय जानकारी के अनुसार, सुबह और शाम के समय इन वन्यजीवों को देखने के अवसर अधिक मिलते हैं। इनका प्राकृतिक वातावरण में दिखाई देना वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए खास अनुभव बन जाता है।
3000 से 5800 मीटर की ऊंचाई पर रहता है हिमालयन आइबेक्स
लाहौल वन मंडल अधिकारी इंद्रजीत सिर्रा ने बताया कि हिमालयन आइबेक्स मुख्य रूप से समुद्र तल से 3000 से 5800 मीटर की ऊंचाई वाले उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में रहता है। भारत में यह लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति और उत्तराखंड के ट्रांस-हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है।
वन्यजीवों से दूरी बनाए रखें पर्यटक
वन मंडल अधिकारी ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि सड़क किनारे या नदी-नालों के पास दिखाई देने वाले इस दुर्लभ वन्यजीव को दूर से ही देखें। उसके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ न करें, उसे डराएं नहीं और नजदीक जाकर फोटो या वीडियो बनाने की कोशिश न करें। उन्होंने बताया कि वन विभाग की टीमें इन क्षेत्रों पर नजर रख रही हैं और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए गश्त बढ़ा दी गई है।