वैज्ञानिक तरक्की भी प्रकृति के नियमों के विपरीत हो रही है, जिसमें दूरगामी प्रभाव पड़ नजर आ रहे हैं। बाढ़ आना और ज्यादा नुकसान होना भी इसी का परिणाम है। डॉ. असवाल ने बताया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट के तौर पर स्थापित होने वाले ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लोफ) अर्ली वार्निंग सिस्टम का निरीक्षण करना और इसके तकनीकी पहलुओं को समझना था। उन्होंने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में ग्लेशियर की झीलों के फटने से अचानक आने वाली बाढ़ एक बड़ी चुनौती है। घेपन झील में स्थापित होने वाली यह आधुनिक प्रणाली आपदा आने से पहले ही चेतावनी जारी करने में सक्षम है। एनडीएमए के अधिकारी इस प्रणाली के सफल प्रदर्शन के माध्यम से इसकी प्रभावशीलता का आकलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्तर पर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण बेहतर कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए इस प्रयास का उद्देश्य बाढ़ से होने वाले नुकसान को रोकना है। कहा कि सरकार, मीडिया, सिविल सोसायटी के प्रयास ही इसमें प्रत्याशित सफलता प्रदान कर सकते हैं। बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे इस महत्वपूर्ण प्रणाली के सफल कार्यान्वयन और तकनीकी टीम के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखें। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के लिए प्रदेश सरकार ने बढ़िया योजना बनाई है। अतिरिक्त सचिव राजस्व एवं डीएमसी निशांत ठाकुर ने इसके अंतर्गत किए जा रहे कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर मुख्य अभियंता जल शक्ति विभाग मंडी जोन ने एक रिपोर्ट की प्रस्तुति दी। बैठक में उपायुक्त लाहौल-स्पीति किरण भड़ाना, उपमंडल अधिकारी मनाली गुंजीत सिंह चीमा, जल शक्ति विभाग के अधीक्षण अभियंता विनोद कुमार, अधिशासी अभियंता कुल्लू अमित ठाकुर, वरिष्ठ अधिकारी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों ने बदलते मौसम के प्रभाव और टिकाऊ निर्माण के उपायों पर चर्चा की
उधर, कांगड़ा जिला मुख्यालय धर्मशाला के समीपवर्ती शीला चौक में ग्रामीण संपर्क सड़कों के सुदृढ़ीकरण और विकास को लेकर दो दिवसीय क्षेत्रीय समीक्षा बैठक वीरवार से शुरू हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) के अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। बैठक का विधिवत शुभारंभ भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव अदिति सिंह ने दीप प्रज्वलन कर किया। कार्यक्रम के पहले दिन जलवायु परिवर्तन के दौर में टिकाऊ बुनियादी ढांचे के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने ग्रामीण सड़क नेटवर्क को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने हेतु निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया। जलवायु अनुकूल अवसंरचना पर बल देते हुए बदलते मौसम के प्रभाव को झेलने वाली टिकाऊ सड़कों के निर्माण पर चर्चा हुई।
रखरखाव की चुनौतियां विषय के तहत पुलों और जल निकासी प्रणालियों के रखरखाव में आने वाली बाधाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। वहीं योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक संसाधनों और वित्तीय पहलुओं पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। ग्रामीण सड़क योजनाओं की वर्तमान प्रगति और भविष्य की दिशा पर विशेषज्ञों द्वारा प्रकाश डाला गया। बैठक में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के पूर्व प्राध्यापक डॉ. चंदन घोष, डॉ. आईके पटेरिया, आईआईटी मंडी के प्रोफेसर डॉ. कला वेंकट उदय, और आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन की निदेशक रंजिनी मुखर्जी सहित कई गणमान्य अधिकारियों ने अपने सुझाव साझा किए। शुक्रवार को बैठक के दूसरे दिन तकनीकी सत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसमें विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की कमियां, डिजाइन मानकों का एकरूपीकरण और निर्माण के दौरान आने वाली बार-बार की तकनीकी समस्याओं के समाधान पर चर्चा होगी। यह दो दिवसीय मंथन ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर, सुरक्षित और बारहमासी सड़क संपर्क सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।