कुल्लू। ढालपुर में लगाई अस्थायी मार्केट में इन दिनों हथकरघा और हस्त शिल्पकारों का बाजार सजा हुआ है। हाथ से तैयार होने वाले उत्पाद की मांग अब प्लास्टिक के उत्पादों के चलते कम हो गई है।
बावजूद इसके कुल्लू में कई परिवारों की रोजी-रोटी लकड़ी से बनाए जाने वाले किल्टे, टोकरी आदि से चलती है। इस बार अस्थायी मार्केट में इन कारीगरों की कमाई औसत ही हो पाई है। हालांकि, सामान बेचने के साथ कारीगर अपनी कला जौहर भी दिखा रहे हैं।
कुल्लू में हाथ से सामान बनाने वाले कारीगर पैनू राम ने कहा कि प्लास्टिक के बने सामान ने रोजी-रोटी पर संकट पैदा कर दिया है। बावजूद इसके उन्होंने अपना पुश्तैनी व्यवसाय नहीं छोड़ा। एक ओर सरकार हस्तशिल्प कला को प्रोत्साहित करने की बात करती है, लेकिन आधुनिकता के दौर में इस कला का दम घुटता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का सही मायने में हस्तकला कारीगरों को लाभ मिलना चाहिए। एसडीएम सदर विकास शुक्ला ने कहा कि प्रशासन इस दिशा में प्रयासरत है। पिछले दिनों ही कुल्लू में सरस मेला आयोजित किया गया, जिसमें देशभर के 10 राज्यों के हस्त शिल्पकारों ने हिस्सा लिया था।