पतलीकूहल (कुल्लू)। घाटी के बागवानों पर कुदरत ने एक बार फिर कहर बरपाया है। पहले ही अनिश्चित मौसम, तापमान में उतार-चढ़ाव और बदलते जलवायु चक्र से जूझ रहे बागवानों की उम्मीदों पर शनिवार को हुई ओलावृष्टि ने गहरा आघात पहुंचाया। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब के पौधों पर हुई फ्लावरिंग पर गिरे ओलों ने महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।
कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहले ही प्रतिकूल मौसम के चलते बागवान नुकसान झेलने को मजबूर हैं। पिछले कुछ दिनों से मौसम साफ रहने पर राहत की उम्मीद जगी थी। इसे सेब की फसल के लिए अनुकूल माना जा रहा था और बेहतर पैदावार की संभावना दिख रही थी। शनिवार को अचानक बदले मौसम ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी।
ऊझी घाटी के नग्गर, नथान, फोजल सहित कई क्षेत्रों में हुई ओलावृष्टि से सेब पौधों में हुई फ्लावरिंग और नव विकसित फलों को नुकसान पहुंचा है। बागवानों का कहना है कि ओलों से फूल झड़ने और फल सेटिंग प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। बागवान रामलाल, सौरव, बुधराम, दौलत राम, आकाश और सूरत राम ने सरकार से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर शीघ्र राहत देने की मांग की है। उधर, कुल्लू फलोत्पादक मंडल के अध्यक्ष प्रेम शर्मा ने भी माना कि मौसम की मार से फसल प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि ऊझी घाटी में हुई ओलावृष्टि ने बागवानों को दिक्कतों में डाल दिया है। संवाद