कुल्लू। संस्कृति मंत्रालय की ओर से संचालित ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण में देश की पांडुलिपि विरासत के संरक्षण और दस्तावेजीकरण के लिए व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया ने आम जनता से सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य देशभर में उपलब्ध अप्रकाशित एवं असूचीबद्ध पांडुलिपियों का संकलन, संरक्षण और अभिलेखीकरण सुनिश्चित करना है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए इस बहुमूल्य धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।
भाषा एवं संस्कृति विभाग के अनुसार कई प्राचीन पांडुलिपियां अभी भी मंदिरों, बौद्ध मठों, निजी परिवारों, व्यक्तियों, संस्थाओं, संगठनों एवं विभिन्न समुदायों के पास सुरक्षित हैं। उनका अब तक कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार नहीं हो पाया है। ऐसे में यह सर्वेक्षण इन दुर्लभ दस्तावेजों को पहचानने और संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। संवाद