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हिमाचल से यूरोपियन देशों में निर्यात की जा रही गुच्छी

Thu, 09 Jun 2016 10:24 PM IST
कुल्लू/ खराहल
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गुच्छी - फोटो : अमर उजाला
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यूरोपियन देेश फ्रांस, इंग्लैंड, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, कनाडा और अन्य देशों में हिमाचल से भारी मात्रा में गुच्छी सप्लाई की जा रही है। सूबे के वन क्षेत्रों और बगीचों में प्राकृतिक तौर पर उगने वाली गुच्छी को औषधि के लिए यूरोपियन देशों को निर्यात किया जा रहा है। यूरोपियन देशों में गुच्छी हिमाचल के भाव से चार गुना अधिक दामों पर बेची जा रही हैै। गुच्छी को दिल और अन्य रोगों के लिए आयुर्वेद में रामबाण माना गया है। कुल्लू, शिमला, किन्नौर और मंडी जिलों में गुच्छी की पैदावार प्राकृतिक तौर पर जंगलों और बगीचों में होती है।
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गुच्छी की सबसे अधिक मांग यूरोपियन देशों में है। इस बहुमूल्य औषधीय वन संपदा को इंटरनेशनल और नेशनल मार्केट में पहुंचाने के लिए कारोबारियों ने दस्तक देना शुरू कर दिया है। गुच्छी को औषधि के अलावा देश-विदेश के नामी पांच सितारा होटलों में विशेष डिश के तौर पर परोसा जाता है। अकेले कुल्लू जिले में ही हर वर्ष गुच्छी से ग्रामीण 12 से 15 करोड़ रुपये का कारोबार करते हैं जबकि हिमाचल में इसका कारोबार 70 करोड़ तक पहुंच जाता है। गत वर्ष गुच्छी के दाम करीब 15 हजार रुपये प्रति किलो थे। कारोबारियों की मानें तो इस वर्ष पिछले साल की अपेक्षा गुच्छी के दाम गिरे हैं।

नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. आईएम शर्मा के अनुसार गुच्छी के सेवन से मोटापा, हृदयरोग, शूगर, न्यूरेटिक, नपुंसकता जैसी बीमारियां दूर होती हैं। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अनुसंधान केंद्र मंडी के प्रभारी डॉ. एसके शर्मा ने बताया कि गुच्छी को हृदय रोगियों के लिए बेहद उपयोगी माना गया है। गुच्छी का पाउडर बनाकर मरीजों को दिया जाता है। कुल्लू में गुच्छी के व्यापारी एवं पूर्व मंत्री पंडित खीमी राम का कहना है कि इस बहुमूल्य औषधीय वन संपदा की मांग यूरोपियन देशों में सबसे अधिक है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक भी औषधीय गुणों से परिपूर्ण गुच्छी का विकल्प तलाशने में नाकाम हैं।
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