कुल्लू। घेपन ग्लेशियल झील से जुड़े संभावित जोखिमों का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) की पांच विशेषज्ञों की टीम मंगलवार को क्षेत्र के लिए रवाना हुई। टीम के साथ लाहौल-स्पीति प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद हैं। टीम करीब 14 दिन तक घेपन झील और इसके आसपास के क्षेत्र में रहकर विस्तृत वैज्ञानिक सर्वेक्षण करेगी।
विशेषज्ञ झील की मौजूदा स्थिति, गहराई, जल प्रवाह, आसपास के भू-भाग और मौसम संबंधी परिस्थितियों का अध्ययन करने के साथ संभावित भूस्खलन और हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्रों का भी आकलन करेंगे। घेपन झील के संभावित फटने की स्थिति में सिस्सू से हिमाचल प्रदेश की अंतिम सीमा तक 34 स्थानों को संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है। जीएसआई के अध्ययन से इन क्षेत्रों में ग्लेशियल झील से जुड़े संभावित खतरों का वैज्ञानिक आकलन करने और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
क्षेत्र में टीम के ठहरने, आवागमन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था का जिम्मा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण लाहौल-स्पीति को सौंपा गया है। उपमंडलाधिकारी केलांग कुनिका ऐकर्स ने बताया कि टीम सुबह करीब पांच बजे घेपन झील क्षेत्र के लिए रवाना हुई। जिला आपदा प्रबंधन के अधिकारी और कर्मचारी भी टीम के साथ गए हैं।
उपायुक्त किरण भड़ाना ने बताया कि टीम घेपन झील क्षेत्र की मैपिंग करेगी। इसके अलावा हिमस्खलन और भूस्खलन की दृष्टि से संभावित संवेदनशील क्षेत्रों का सीमांकन, झील की गहराई, जल प्रवाह और मौसम संबंधी आंकड़ों का अध्ययन किया जाएगा। अध्ययन के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
नेपाल त्रासदी के बाद बढ़ी सक्रियता
नेपाल में हाल में हुई त्रासदी के बाद क्षेत्र में संभावित आपदाओं को लेकर प्रशासनिक सक्रियता बढ़ी है। घेपन झील से संभावित खतरे को देखते हुए वैज्ञानिक अध्ययन और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जीएसआई की टीम को झील क्षेत्र के विस्तृत अध्ययन के लिए भेजा गया है।