ढालपुर में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हुए मजदूर व किसान। संवाद। स्त्रोत अमर उजाला
कुल्लू। जिला मुख्यालय कुल्लू में मंगलवार को मजदूर और किसान मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे। सीटू और हिमाचल किसान सभा के बैनर तले मजदूरों और किसानों ने सरवरी से लेकर उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकालकर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई।
उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भी भेजा गया। मांग की गई कि सभी तरह के मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये प्रतिमाह दिया जाए।
किसान सभा के राज्य महासचिव होतम सौंखला ने कहा कि मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा के ऐतिहासिक आंदोलन की चौथी वर्षगांठ है। आंदोलन को मोदी सरकार की ओर से मांगों को पूरा करने का आश्वासन देने के बाद स्थगित किया था, लेकिन आज तक उनकी एक भी मांग पूरी नहीं हुई है। फसलों का डेढ़ गुना एमएसपी, किसानों की कर्जा मुक्ति, किसान आंदोलन में शहीद हुए उनके परिवारों को मुआवजा, आंदोलन के दौरान हुए दायर केस अभी वापस नहीं हुए हैं। किसानों को जमीन का भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत चार गुना मुआवजा नहीं मिल रहा है। मनरेगा के तहत 200 दिन का काम और 600 रुपये दिहाड़ी मजदूरों को घोषित की जाए। सीटू जिला महासचिव राजेश ठाकुर ने कहा कि मजदूरों के श्रम कानूनों को समाप्त कर पूंजिपतियों को फायदा पहुंचाने का काम केंद्र सरकार कर रही है। आउटसोर्स और ठेकेदारी को समाप्त किया जाए।
मोदी सरकार पूंजीपतियों के पक्ष में नीतियां बनाकर लगातार मजदूरों का शोषण कर रही है। देश में महंगाई और बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। इस दौरान किसान सभा के जिला अध्यक्ष गोविंद भंडारी, सीटू जिला कार्यकारी अध्यक्ष चमन ठाकुर, देवराज नेगी, ममता नेगी, चमन ठाकुर मौजूद रहे।