लाहौल-स्पीति की घेपन हिमनदीय झील का दायरा करीब 176 फीसदी बढ़ने के बाद प्रशासन ने संभावित बाढ़ के खतरे को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। चंद्रभागा नदी के किनारे बसे रिहायशी क्षेत्रों में उच्चतम बाढ़ स्तर यानी एचएफएल की मार्किंग की जा रही है। सिस्सू से पांगी के संसारी बॉर्डर तक 32 रिहायशी क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है। इन स्थानों पर करीब 128 बुर्जियां स्थापित की जाएंगी।
जल शक्ति विभाग ने हाइड्रोलॉजी विभाग हिमाचल प्रदेश से एचएफएल मार्किंग की अनुमति लेने के बाद यह प्रक्रिया शुरू की है। प्रत्येक एचएफएल मार्किंग स्थल पर चार बुर्जियां लगाई जाएंगी। इनमें दो बुर्जियां वर्तमान में चंद्रभागा नदी के बहाव वाले स्थान पर और दो संभावित उच्चतम बाढ़ स्तर को दर्शाने वाले स्थान पर स्थापित की जाएंगी। प्रशासन का उद्देश्य संभावित बाढ़ की स्थिति में पानी के पहुंचने वाले क्षेत्रों की पहचान करना है, ताकि संवेदनशील आबादी और महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों को लेकर समय रहते सुरक्षा योजना तैयार की जा सके।
पांगी के पांच गांव भी खतरे के दायरे में
चंबा जिले के पांगी उपमंडल में भी एचएफएल मार्किंग के लिए पांच गांवों को चिह्नित किया गया है। इनमें फिंडपार, फिंडरू, अजोग, टड और शौर शामिल हैं। प्रशासन ने इन गांवों में चंद्रभागा नदी के किनारे बने घरों को भी चिह्नित किया है। ग्रामीणों को नदी के किनारे की जमीन पर नए मकान नहीं बनाने की हिदायत दी जा रही है। प्रशासन पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ बैठकें कर नदी से सुरक्षित दूरी पर स्थित घरों को भी चिह्नित कर रहा है।