कुल्लू। जिले में नगदी फसल लहसुन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। तीन महीने से बारिश न होने के कारण जिले में लहसुन की 30 फीसदी फसल खराब हो गई है। जिले में लगभग 20,000 से अधिक किसान लहसुन की खेती से जुड़े हैं और 1,500 हेक्टेयर में लहसुन की बिजाई की जाती है।
अक्तूबर से बारिश नहीं हुई है। इससे किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। सिंचाई की सुविधा न होने के कारण खेती बारिश पर ही निर्भर है। बारिश नहीं होने से नगदी फसलों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बरसात में भारी बारिश से फलों के साथ अन्य फसलों का नुकसान हुआ और अब सर्दी में चारों तरफ सूखे की मार पड़ी है।
लहसुन उत्पादक घुहाटन निवासी टेक सिंह राॅकी, बनाला के किसान बेली राम, शिव राम तथा फनौटी गांव के खेम राज और उगम राम ने कहा कि सूखे जैसे हालातों के कारण लहसुन की फसल सूखने लगी है। पहले फसल पीली पड़ी और अब पौध सूखने लगी है। कहा कि देवी-देवताओं के पास भी गए, लेकिन बारिश की संभावनाओं से इंकार किया है।
अगर इस महीने बारिश नहीं हुई तो लहसुन की फसल पूरी तरह से खराब हो जाएगी। जमीन में नमी के अभाव से लहसुन पर संकट आ गया है। कृषि उपनिदेशक पंचवीर ठाकुर ने कहा कि बारिश न होने से कृषि वैज्ञानिक भी चिंतित है। कहा कि इन दिनों कृषि और बागवानी के लिए बारिश की सख्त जरूरत है। बारिश होती है तो नुकसान कम होगा।
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निरमंड से लेकर बंजार तक लहसुन
जिले में लहसुन एक प्रमुख नगदी फसल है। उम्दा रेट मिलने से किसानों का रुझान लहसुन की फसल पर बढ़ रहा है। जिले में बाह्य सराज, निरमंड, आनी, बंजार, सैंज, तीर्थन, मणिकर्ण, खराहल, भुंतर, बदाह, काईस सहित कई इलाकों में लहसुन की बिजाई की जाती है।