क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में सुविधाओं के अभाव के चलते भटक रहे मरीज और तीमारदार
बोले- कैंटीन और मैस के साथ लगाए ठोस कचरे के ढेर से उठने वाली बदबू कर रही परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। क्षेत्रीय अस्पताल में लगा कूड़े का ढेर बीमारी का इलाज करवाने अस्पताल आ रहे मरीजों की सेहत और बिगाड़ सकता है। मरीजों के साथ तीमारदारों और स्थानीय लोग भी ठोस कचरे के ढेर से उठने वाली बदबू से परेशान हो रहे हैं।
जिस जगह ठोस कचरे का यह ढेर है, उसके साथ ही फुटपाथ है। दूसरी ओर कैंटीन और मैस हैं। यहां मरीजों के लिए खाना तैयार किया जाता है। दूसरी ओर, शौचालय भी ताले में बंद रखे गए हैं। दर्द से कराह रहे मरीजों को 150 से 200 मीटर की दौड़ लगाने के बाद सुलभ शौचालय तक पहुंचना पड़ रहा है। इससे उनका दर्द कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि अस्पताल प्रबंधन मरीजों, तीमारदारों और लोगों की सेहत को लेकर कितना गंभीर है।
अस्पताल के नए भवन में मेडिसिन, त्वचा रोग, नेत्र, सर्जरी, हड्डी रोग और महिला-पुरुषों की अलग-अलग सामान्य ओपीडी हैं। इनमें रोजाना हजारों मरीज उपचार करवाने पहुंचते हैं। मरीजों और तीमारदारों को शौचालय की सुविधा भी नहीं मिल रही है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। इस परेशानियां झेलनी पड़ रहीं हैं। उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनआर पवार ने कहा कि मरीजों की सुविधा के लिए शौचालयों का रखरखाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कूड़े को हटाने के प्रयास जारी हैं।
क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू की मेडिसिन और त्वचा रोग ओपीडी के साथ धरातल मंजिल में स्थित शौचालय के दरवाजों में ताले लटके हैं। शौचालय की व्यवस्था न होने की वजह से परेशान होना पड़ा। -शांति, निवासी बजौरा
क्षेत्रीय अस्पताल में जोड़ों के दर्द का उपचार करवाना आया था, लेकिन दर्द के बीच शौचालय के लिए 150 से 200 मीटर दूर स्थित सुलभ शौचालय को ढूंढना पड़ा। अस्पताल की पहली मंजिल में शौचालय बंद था। -धनी राम, निवासी काथी-कुकड़ी
क्षेत्रीय अस्पताल के ट्राॅमा सेंटर (आपातकालीन ओपीडी) और कैंटीन के पास कूड़ा डंप किया जा रहा है। इस कारण मरीजों और तीमारदारों के अलावा कैंटीन में खाना-खाने आने वाले लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। -अमर, निवासी कुल्लू
क्षेत्रीय अस्पताल का कूड़ा परिसर में डंप किया जा रहा है। कूड़े के अंबार से बदबू उठने लगी है। जहां कूड़ा डंप है, इसके साथ ही रास्ता और सड़क हैं। मरीजों-तीमारदारों के अलावा राहगीरों को दिक्कत हो रही है। इससे बीमारी का खतरा भी बना है। -परम देव, निवासी बंजार