कड़ाके की ठंड में शेड में रातें काट रहे माहिली बिहाल गांव में पांच परिवार
बोले- जमीन और आशियाने खो दिए, हमारे लिए अभी खत्म नहीं हुई आपदा
बाढ़ में सब कुछ बहा, घर बनाएं तो कहां, सरकार से धनराशि मिलने का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी
कुल्लू। माहिली बिहाल गांव में पांच परिवारों की रातें घरों में नहीं, टीन की चादरों के नीचे कट रही हैं। ब्यास नदी की बाढ़ ने जिन पांच परिवारों से जमीन और आशियाने छीन लिए, उनके लिए आपदा अभी खत्म नहीं हुई है।
माइनस तापमान में खुले जंगल के किनारे खड़े टीन के शेड इन परिवारों की मजबूरी बन चुके हैं जहां हर रात को डर, ठंड और इंतजार में साथ सोते हैं। प्रभावित परिवारों को सरकार से घर बनाने के लिए जमीन और धनराशि मिलने का इंतजार है।
गौर रहे कि वर्ष 2023 की आपदा में ब्यास नदी की बाढ़ से इन परिवारों के घरों को नुकसान पहुंचा था। बाकी कसर 2025 की आपदा ने पूरी कर दी। जमीन और घर ब्यास की भेंट चढ़ गए। अब स्थिति यह है कि घर बनाएं तो कहां बनाएं। बाढ़ में सब कुछ बह गया। जैसे-तैसे एक जगह पांच परिवारों ने टीन के शेड बनाए हैं। इनमें गुजारा कर रहे हैं। माइनस तापमान के बीच टीन के शेड में रातें बिताना कोई आसान काम नहीं है। मजबूरी में ये परिवार टीन के शेड में रातें बिता रहे हैं।
हालांकि कुछ समय तक तो ये परिवार बिना बिजली रहे। जन प्रतिनिधियों के प्रयासों से बिजली की व्यवस्था कर दी गई है लेकिन प्रभावित परिवारों की समस्याएं अभी कम नहीं हुई हैं।
आपदा के कहर से टीन के शेड में रहने को मजबूर हैं। ब्यास नदी की बाढ़ ने जीवन भर की कमाई के साथ जमीनें भी छीन लीं। अब सरकार से यही उम्मीद है कि घर बनाने के लिए जमीन मिलेगी। इसके बाद ही आशियाने बसा पाएंगे। - पार्वती देवी
रात के समय तापमान माइनस में जा रहा है। टीन के शेड में परिवार के साथ रातें बितानी पड़ रही हैं। पांच महीने पहले आई आपदा का दंश झेल रहे हैं। प्रदेश सरकार और प्रशासन से अब मदद की गुहार लगा रहे हैं। - आलू राम, प्रभावित
ग्रामीणों की समस्या जानने के लिए खुद मौका गया है। बिजली और पानी का प्रबंध कर दिया गया है। प्रभावित परिवारों की मदद का प्रयास जारी है। लोगों को भी इनकी मदद करने के लिए आगे आना चाहिए। - खेखराम ठाकुर, नग्गर खंड, पंचायत समिति चेयरमैन