करपट गांव के बाढ़ प्रभावित ग्रामीण टेंटों में रहने पर मजबूर, अब भूस्खलन ने बढ़ाई असुरक्षा
टेंटों पर गिरा भारी पत्थर, जानमाल के नुकसान का खतरा बढ़ा
ग्रामीण मांग रहे स्थायी पुनर्वास, सरकार से जल्द कार्रवाई की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
केलांग (लाहौल-स्पीति)। लाहौल-स्पीति के करपट गांव में बाढ़ के बाद भूस्खलन ने मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं। बड़े पत्थर टेंटों पर गिरने से ग्रामीणों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। बाढ़ से घर छोड़कर अस्थायी टेंटों में रहने वाले ग्रामीण अब पुनर्वास की मांग कर रहे हैं ताकि वे सुरक्षित जीवन यापन कर सकें।
सोमवार दोपहर को पहाड़ी से बड़ा पत्थर टेंटों पर आ गिरा। इससे टेंट क्षतिग्रस्त हो गए। गनीमत रही कि उस समय ग्रामीण टेंटों में नहीं थे। अन्यथा, बड़ा हादसा हो सकता था।
बाढ़ प्रभावित मयाड़ घाटी के करपट निवासी कुछ दिन से घर छोड़कर अस्थायी टेंटों में रह रहे हैं। आपदा ने उन्हें यहां भी असुरक्षित कर दिया है। ग्रामीणों ने कहा कि हर साल बाढ़ आने से गांव असुरक्षित हो चुका है। अब स्थायी पुनर्वास ही एकमात्र समाधान है। समाजसेवी हरि ठाकुर ने सरकार से मांग की है कि करपट गांव के लोगों को पुनदग और थारग में बसाया जाए। उन्होंने कहा कि समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिया तो भविष्य में जान-माल की बड़ी हानि हो सकती है।
करपट नाले के कारण लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हुए हैं। वे अब टेंटों में भी सुरक्षित नहीं हैं। सरकार को समस्या का जल्द समाधान निकालना चाहिए। - डॉ. रामलाल मारकंडा, पूर्व मंत्री
बीते रविवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया है। टेंटों में रह रहे लोगों को आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। सरकार ग्रामीणों के साथ है। उन्हें सुरक्षित जगह बसाने के प्रयास किए जाएंगे। - अनुराधा राणा, विधायक