सैंज घाटी के लोगों ने डीसी को सुनाया दुखड़ा, कहा- बह गई है सैकड़ों बीघा जमीन और पुश्तैनी घर
परियोजना प्रबंधन के भारी मात्रा में पानी छोड़ने से हो चुका है करोड़ों का नुकसान
सैंज पहुंचीं उपायुक्त तोरुल एस रवीश से मिले आपदा से प्रभावित गांव के लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
सैंज (कुल्लू)। सैंज घाटी के दौरे पर आईं उपायुक्त तोरुल एस रवीश के सामने ग्रामीणों ने जल विद्युत परियोजना से मिले जख्मों की बात रखी।
न्यूली, रोपा, सतेश, करटाह और मतला गांव के लोगों ने कहा कि परियोजना प्रबंधन की लापरवाही से पुश्तैनी घर, सैकड़ों बीघा जमीन और घराट नदी की भेंट चढ़ गए। परियोजना के निहारणी डैम से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से लोगों को अब तक करोड़ों का नुकसान हुआ है। इसके एवज में मुआवजे के तौर पर फूटी कौड़ी नहीं दी गई।
पंचायतों प्रतिनिधियों और आम जनता के गुहार लगाने के बाद भी नदी के किनारे सुरक्षा दीवार नहीं लगाई जा रही है। ग्रामीण ज्ञान चंद, नारायण सिंह, गुमत राम, लाल चंद, कौल राम, कमल सिंह, रमेश कुमार और यज्ञ चंद ने उपायुक्त से बताया कि 2023 की आपदा के दौरान परियोजना के निहारणी डैम से भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया। डैम से आगे पंचायतों में इससे बड़ी तबाही हुई। दर्जनों मकान और सैकड़ों बीघा जमीन बाढ़ अपने साथ बहाकर ले गई। छह पुल, कई पैदल रास्ते और सड़कें नदी में समा गईं। इसके बाद भी परियोजना प्रबंधन ने सबक नहीं लिया। बिना पूर्व सूचना भारी मात्रा में बार-बार पानी छोड़ा जाता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा दीवारें लगानी की बात आई तो परियोजना प्रबंधन ने अपने चहेतों को बंदरबांट की। प्रभावित ग्रामीण आज भी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। देहुरीधार, शैंशर, गाड़ा पारली, शांघड़ और सुचैहन पंचायतों में दर्जनों लोग परियोजना प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं। रास्ते, पुल और सड़कें बनने में आनाकानी की जा रही है।
देहुरीधार पंचायत के प्रधान भगत राम आजाद ने कहा कि नदी के किनारे सुरक्षा प्रबंध करने के कई प्राकलन दिए गए हैं, लेकिन परियोजना प्रबंधन चहेतों को खुश करने में लगा है। उपायुक्त ने परियोजना प्रबंधन से बैठक कर निष्कर्ष निकालने का भरोसा दिया है।