भुंतर स्थित कुल्लू-मनाली एयरपोर्ट में 12 दिनों से हवाई जहाज की उड़ानें नहीं हो पाईं हैं। ऐसे में घाटी में हाई प्रोफाइल पर्यटक नहीं आने से कुल्लू-मनाली का पर्यटन कारोबार बैकफुट पर आ गया है। अब 27 दिसंबर मंगलवार को भुंतर में जहाज उतरने की उम्मीद है। सोमवार को कुल्लू और भुंतर के आसपास एक किलोमीटर से घटकर छह किलोमीटर तक विजिबिल्टी में कमी आई है। ऐसे में 26 दिसंबर मंगलवार तक रद्द हवाई उड़ानों के 27 दिसंबर को आने की उम्मीद बंधी है। बावजूद इसके हवाई उड़ान मौसम पर निर्भर रहेगी। दिसंबर माह में दिल्ली-भुंतर के बीच मात्र एक सप्ताह तक ही उड़ानें हो सकी हैं। तीन हफ्ते तक उड़ानें नहीं होने से इसका असर पर्यटन कारोबार पर भी देखने को मिला है। क्रिसमस पर भी हाई प्रोफाइल सैलानियों के नहीं आने से इस साल 20 फीसदी कम पर्यटक पहुंचे हैं।
पर्यटन कारोबारी भी हवाई उड़ानों के न होने से निराश हैं। भुंतर एयरपोर्ट के निदेशक एएन शर्मा के अनुसार घाटी में भारी धुंध होने की वजह से उड़ानों को 26 दिसंबर तक रद कर दिया गया था। 27 को उड़ान आने की पूरी संभावना है। फिर भी उड़ान मौसम पर निर्भर रहेगी। सोमवार को भुंतर एयरपोर्ट के आसपास विजिबिल्टी में कमी पाई गई। वे एक किलोमीटर से घटकर छह किलोमीटर रह गई थी। विमान को लैंड करने के लिए पांच किलोमीटर विजिबिल्टी की आवश्यकता है। उधर, इस संबंध में मनाली होटल एसोसिएशन के प्रधान गजेंद्र ठाकुर ने कहा कि हवाई उड़ानों के बार-बार रद्द होने से इसका असर पर्यटन कारोबार पर पड़ने लगा है। नए साल के साथ विंटर कार्निवाल शुरू होने में कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में अगर धुंध के कारण उड़ान नहीं हुई तो इसका न्यू ईयर के साथ-साथ विंटर कार्निवाल के कारोबार पर पड़ेगा।