कुल्लू। जिले में अप्रैल में बेमौसमी हिमपात और ओलावृष्टि ने बागवानों की कमर तोड़ दी है। किसानों-बागवानों को करोड़ों रुपयों का नुकसान हुआ है। पहले पहाड़ों पर हुई बर्फबारी से फ्लॉवरिंग और सेब की सेटिंग को नुकसान हुआ है और अब ओलों की मार ने बागवानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बागवानी और कृषि विभाग ने अप्रैल महीने की प्रारंभिक रिपोर्ट बनाकर प्रदेश सरकार को भेज दी है।
कुल्लू के बागवानों को हर साल मौसम की मार झेलनी पड़ रही है। जिले के 90 प्रतिशत लोगों की आर्थिकी का जरिया बागवानी ही है। इस बार भी जिले के बागवानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ा है। पहले अप्रैल में रोहतांग, अटल टनल और जलोड़ी दर्रा सहित ऊंची चोटियों में हुई बर्फबारी से तापमान में भारी गिरावट आने से सेब के बगीचों में आए फूल झड़ गए।
जिले के कई इलाकों में 60 से 80 फीसदी तक सेब की फसल तबाह हो गई। बागवानी विभाग के अनुसार अप्रैल में ओलावृष्टि से जिले मेें एक करोड़ 20 लाख का नुकसान हुआ है। इसमें 90 लाख रुपये की फसल और 30 लाख रुपये सेब के पौधों को नुकसान पहुंचा है। कृषि विभाग को भी ओलों से एक करोड़ 19 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। ओलों से मटर और सब्जियाें की फसलों को भारी क्षति पहुंची।
बागवान लीला प्रसाद, मोहन ठाकुर, कर्म सिंह ठाकुर, खेम राज, केहर सिंह और प्यारे लाल ने कहा कि पहले बेमौसमी बर्फबारी से ठंड बढ़ गई। इससे फ्लॉवरिंग और सेटिंग खराब हुई। अब ओलों की मार से सारी उम्मीदों को चकनाचूर कर दिया है। कहा कि जिन इलाकों में सेब की फसल बची है वहां भी 50 से 60 फीसदी ही फसल है। खतरा अभी टला नहीं है, क्योंकि मई के अंत तक ओलावृष्टि का दौर जारी रहता है। बागवानी विभाग के उपनिदेशक राज कुमार ने कहा कि जिले में ओलावृष्टि से एक करोड़ 20 लाख रुपये का प्रारंभिक नुकसान हुआ है।