कुल्लू। भीषण अग्निकांड में कोटला गांव राख के ढेर में बदल गया है। प्रभावितों के अश्रु थम नहीं रहे हैं। इस बात की भी टीस है कि अगर उनके घरों तक सड़क बनी होती तो शायद उनकी जीवनभर की कमाई आग की भेंट न चढ़ती। उधर, अग्निशमन विभाग का भी यही कहना है। सड़क न होने से गाड़ी गांव से करीब दो किलोमीटर पीछे ही रह गई।
फायर ब्रिगेड टीम को लीड कर रहे फायर मैन भीम सिंह ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि गांव तक एक संपर्क मार्ग बना था लेकिन इस पर भी कहीं मलबा गिरा था तो कहीं सड़क संकरी थी। अगर संपर्क मार्ग ठीक होता तो विभाग का स्माल वाटर टेंडर गांव तक पहुंच सकता था। यहां बड़ी गाड़ी नहीं पहुंच सकती थी। इसकी सूचना कमांडर को दी गई और जवान मौके पर पैदल पहुंचे। लोगों के साथ काम में हाथ बंटाया और आठ घरों को किसी तरह बचा लिया गया। फायर मैन भीम सिंह से सवाल किया गया कि अगर विभाग की गाड़ी मौके पर पहुंचती तो क्या आग पर काबू पाया जा सकता था। इस पर उन्होंने कहा कि सिलेंडर फट रहे थे। आग पर काबू पाना इतना आसान न था लेकिन इतना जरूर है कि गाड़ी मौके पर पहुंचती तो कुछ घर जरूर बचाए जा सकते थे।
उन्होंने यहां के बाशिंदों से अपील की है कि गांव में पंचायत की योजना के तहत टैंक का निर्माण भी करना चाहिए ताकि किसी भी परेशानी के समय पानी का प्रयोग किया जा सके। हालांकि घटना के दूसरे दिन सड़क को ठीक करने का काम शुरू कर दिया गया था।