बागवानी विशेषज्ञ बोले- पौधों के विकास और गुणवत्ता के लिए जरूरी है खाद
कुल्लू में होता है करोड़ों के लहसुन का कारोबार, दक्षिण भारत है काफी मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
खराहल (कुल्लू)। जिले में लहसुन की खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। किसान नगदी फसल से अपनी आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं। लहसुन उत्पादकों को कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि लहसुन पौधों की ग्रोथ के लिए निराई कार्य के साथ नत्रजन खाद डालें।
इससे लहसुन फसल की बढ़ोतरी और गुणवत्ता बेहतर होगी। लिहाजा, किसान को समय रहते लहसुन फसल की निराई करनी चाहिए। खेतों में नमी पर्याप्त होने से किसान समय रहते नकदी फसल लहसुन की निराई करें। इस बार बारिश तीन माह देरी से होने की वजह से लहसुन का विकास धीमी गति से हो रहा है। ऐसे में किसान पहली निराई करने में इन दिनों व्यस्त हो गए हैं।
जिले में करीब 1700 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन की पैदावार हो रही है। बर्फबारी और बारिश के बाद पौधों की वृद्धि होनी शुरू हो रही है। खरपतवार की वजह से फसल के उत्पादन प्रतिकूल असर पड़ता है। इसे निजात पाने के लिए किसान को दो-तीन बार निराई करनी चाहिए।
अगर कहीं सूखे की स्थिति है तो सिंचाई का विशेष ध्यान रखें। लहसुन उत्पादक अमित कुमार, बेली राम, ज्ञान ठाकुर और देवराज ने कहा कि इन दिनों लहसुन की निराई कर रहे हैं। बारिश होने के कारण लहसुन के पौधों का विकास बेहतर हो रहा है। जिले के लहसुन की मांग दक्षिण भारत में सबसे अधिक रहती है। जिले में करोड़ों का कारोबार होता है। कृषि उपनिदेशक सुशील शर्मा ने कहा कि खरपतवार उगने से फसल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। किसानों को दो-तीन बार फसल की निराई करनी जरूरी है। इससे पौधों का विकास बढि़या और गुणवत्ता भी अच्छी होती है। कहा कि किसान समय-समय पर निराई और खाद का डालते रहें। अधिक जानकारी के लिए कृषि विशेषज्ञों से समय पर संपर्क करें।
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